Tuesday 18th May 2021

अचेतन मन की शक्ति से सफल लोग

अचेतन मन की शक्ति से सफल लोग

लेख*सोनी जैन

स्वामी विवेकानंद ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही कि “ब्रह्मांड की सारी शक्तियां हमारे अंदर हैं पर हम ही हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने हाथ रखा है और रोते हुए कह रहे हैं कि अंधेरा है।” स्वामी विवेकानंद जी द्वारा कहे गए शब्द हमारे अचेतन मन के लिए ही कहे गए है। हमारा अनकॉन्शियस या सबकॉन्शियस माइंड हमारा भरपूर साथ देता है जबकि हम अपने किसी विचार या इच्छा पर प्रबल रूप से विश्वास करते हैं या दूसरे शब्दों में कह लीजिए कि जब हम किसी चीज को करने की जिद ठान लेते हैं तो हमारा अचेतन मन ब्रह्मांड की शक्तियों का सहारा लेकर उस विश्वास को पूरा करता है।



अनेक लोगों ने अनकॉन्शियस माइंड की पावर से ब्रह्मांड की शक्तियों को आकर्षित करके अपने सपनों को साकार किया है। उदाहरण के तौर पर 23 साल की युवा खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की बात करते हैं जिन्होंने एक दुखद और दर्दनाक हादसे में अपना एक पैर गवा दिया लेकिन किसी तरह से उनकी जान बच गई। जान बचने के बाद अरुणिमा सिन्हा ने सोच लिया कि भगवान ने मुझे जिंदगी दी है तो कुछ बड़ा करके दिखाऊंगी और ठान लिया कि अब तो एवरेस्ट को ही फतह करना है। बिना पैर के एवरेस्ट फतह करने का सपना तो कोई पागल ही देख सकता है। लेकिन अरुणिमा ने जो सोचा था उस पर उसका अटूट विश्वास था जिसके लिए उसने जी जान से मेहनत की और विश्वास के बल पर उसको फतह कर भी लिया।इस कार्य में उनके अचेतन मन की शक्ति ने हर जगह उन्हें सहयोग किया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसी प्रकार अचेतन मन की शक्ति को जागृत करके पैडमैन कहे जाने वाले तमिलनाडु के अरुणाचलम मुरूगननाथम ने अपनी पत्नी को महावारी के दौरान होने वाली तकलीफ से बचाने की ठान ली और कोई अनुभव और शिक्षा ना होते हुए भी सारी समस्याओं को पीछे छोड़ते हुए वह कर दिखाया जो बड़ी-बड़ी कंपनियों के बस की बात नहीं थी। उन्होंने एक ऐसा सेनेटरी पैड बनाया जो कि बहुत ही सस्ता और सुरक्षित था जिससे न केवल उनकी पत्नी की बल्कि लाखों गरीब महिलाओं के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन ला कर रख दिया। इसी प्रकार अलोनमक्स मैरीकॉम,डॉ० कलाम,मिल्खा सिंह आदि सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने अचेतन मन की ताकत से सफलता पाई है।



सामूहिक रुप से भी इस प्रकार के बहुत से उदाहरण हमें देखने को मिलते हैं जैसे कि इसरो के वैज्ञानिकों ने ठान ली कि हमें चीन से पहले पूर्णता स्वदेशी सैटेलाइट को मंगल ग्रह पर भेजना है, बहुत परेशानी आई पर उन्होंने हार नहीं मानी। एक बार तो उनका मिशन बंद होने की नौबत आ गई बजट भी बहुत कम था लेकिन सारी कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए 2014 में मंगलयान का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक कर दिया गया जो कि हमारे देश के लिए बहुत बड़ी सफलता थी जिसके पीछे मात्र एक इरादा और दृढ़ विश्वास था। दोस्तों हम अपने अचेतन मन की शक्ति के द्वारा ब्रह्मांड की सभी शक्तियों को आकर्षित करके अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।



*सोनी जैन,मेरठ
(मनोवैज्ञानिक एवं स्वतंत्र लेखिका)

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