Wednesday 21st April 2021

आजाद हिंद फौज की आखिरी शमा थी दादी अम्मा

आजाद हिंद फौज की आखिरी शमा थी दादी अम्मा

श्रद्धांजलि - *मीरा सिंह 'मीरा'

कानपुर की मानवती आर्या जी शुक्रवार दिनांक 20 दिसम्बर 19 को रात नौ बजकर पांच मिनट पर अपने जीवन के निन्यानवे वसंत देखकर इस दुनिया के रंगमंच से विदा हो गई।उनका जन्म 30अक्टूबर 1920 को हुआ था  ।वो इस दौर की महान शख्सियत थी।गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी मातृभूमि की करूण  पुकार सुन स्वतंत्रता के रण में कूद पड़ी थीं।आजाद हिंद फौज की सेनानी के रूप में देश की सेवा की।आजादी के पश्चात समाज कल्याण के दिशा में सतत कार्य करते रहीं।यहीं नही मरणोपरांत अपना पावन शरीर भी देशहित में दान कर गईं। तन समर्पित, मन समर्पित, अपनी हर धड़कन राष्ट्र को अर्पित करने वाली वीरांगना  दादी अम्मा को अन्तस की गहराई यों से मेरा  शत शत नमन।वो एक लेखिका, संपादिका, समाज सेविका के साथ बहुत नेक इंसान भी थी।उनके अद्भुत व्यक्तित्व को शब्दों में बांध पाना मेरे लिए संभव नहीं है। उनसे जुड़ी एक संस्मरण साझा कर रही हूँ ।उन दिनों मैं कानपुर में थी।इस दौरान कुछेक अवसरों पर उनसे मिलने व कुछ सीखने का सौभाग्य मुझे मिला।  मैं स्नातकोत्तर कर रही थी।लेखन का शुरूआती दौर था।उनकी पत्रिका बाल दर्शन में मेरी दो रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी थी। मुझे याद है जब एक सम्मेलन में मुंशी प्रेमचंद के बेटे अमृतराय जी आए थे ,उसमें दादी अम्मा भी आई थीं।कार्यक्रम की समाप्ति पर जब वह जाने लगीं तो मैं भी उनके साथ चल पड़ी।तभी मेरी नजर उनके थैले पर गई, जो कुछ भारी सा प्रतीत हो रहा था ।विनम्रतापूर्वक मैं उनसे आग्रह की कि वह थैला मुझे दे दें।मेरे रहते वह बोझ ढोएं, मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।इस पर वह मुझे  हंसते हुए समझाई  “बेटा, मैं इसे उठाने में समर्थ हूँ।मेरे विचार से किसी भी समर्थ इंसान को अपना बोझ स्वयं ही उठाना चाहिए।जरूरतमंद की सहायता अवश्य करनी चाहिए पर जो सझम हैं उन्हें अपना कार्य करने देना चाहिए।उस वक्त   उनकी बात सुनकर मैं निरुत्तर हो गई थी “पर उनकी यह बात मेरे मन में गहराई तक उतर  गई थी।उस घटना के बाद उनकी बात  को गुरुमंत्र मानकर मैं अपना हर कार्य स्वयं संपादित करने लगी एवं औरों को भी अपना काम स्वयं करने के लिए प्रेरित करने लगी।अपने काम को स्वयं करते वक्त मैं दादी अम्मा मानवती आर्या जी को अक्सर याद करती हूँ ।

*मीरा सिंह “मीरा”
डुमराँव, बक्सर, बिहार

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