Saturday 25th September 2021

बाल साहित्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ द्वारा देश के प्रसिद्ध बालसाहित्यकारों से की गई परिचर्चा . इस में हम ने यह जानने का प्रयास किया है कि  वे बच्चें के लिए इस वर्ष क्या नया करना चाहते हैं ?

इस वर्ष आप बालसाहित्य और बच्चों के लिए क्या करेंगे ?

परिचर्चा-ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

मुझे एक किस्सा याद आता है. हमारे पड़ोसी बीमार हो गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया. मगर, उन का कहना था कि उन का पुत्र उन्हीं के घर में रहता है, मगर वह एक बार देखने आया. उस के बाद उस ने उन की सेवा नहीं की. वे घर जाते ही पहला काम यह करेंगे कि उस नालायक पुत्र को घर से बाहर निकाल देंगे. जब वे मुझे यह बात कह रहे थे, तब मैं ने उन से कहा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं. तब वे बोले कि जो औलाद पिता के दुख में काम न आए उस का होना न होना बराबर है. यह सुन कर मैं उन का चेहरा देखने लगा.

ये वही पिता थे जिन्हें ने कभी अपनी मातापिता की सेवा नहीं कीं. उन्हें इसी तरह अकेले छोड़ दिया था. अब वे अपने पुत्र से वही अपेक्षा कर रहे थे, जो उन के मातापिता ने उन से की थी. पुत्र ने जैसा देखा वैसा ही वह कर रहा था. यह देखसोच कर लगा कि हमें बालसाहित्य और बालकों के लिए कुछ करना चाहिए. मगर, क्या करना चाहिए. इस की बानगी इस परिचर्चा में प्रस्तुत है.

विगत दिनों इंदौर में एक सातवीं कक्षा की बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. उस को गणित विषय में अत्यंत कम अंक प्राप्त हुए थे . पिता ने पुनर्निरीक्षण का आवेदन दिया. दुःख की बात यह रही कि पुनर्निरीक्षण में बालिका के अंक 85 से अधिक प्राप्त हुए. किंतु धैर्य नहीं होने के कारण उस बच्ची ने परिणाम आने के पूर्व ही आत्महत्या कर ली. इंदौर में छोटे-छोटे बच्चों की आत्महत्या के इस तरह के प्रसंग समाज को लगातार उद्वेलित कर रहे हैं.

बच्चों की प्रसिद्ध पत्रिका- देवपुत्र के संपादक डॉक्टर विकास दवे का कहना है कि इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रख कर विवेकानंद केंद्र के साथ बच्चों  के लिए एक मनोविज्ञान परामर्श का केंद्र प्रारंभ करने कि मुझे लंबे समय से इच्छा थी. मैं क्यों कि विगत 20 -25 वर्षों से सतत बाल मनोविज्ञान का अध्ययन कर रहा हूं.  बच्चों के साथ लगातार संवाद और काउंसलिंग करने का अवसर भी प्राप्त होता रहता है. अभी तक यह कार्य संस्थागत रूप से न करते हुए व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर परिवारों में जा कर कर रहा था.आने वाले वर्ष में विधिवत बच्चों की काउंसलिंग का केंद्र प्रारंभ करने का निर्णय लिया है. कार्यालय समय छोड़ कर व्यक्तिगत समय में से समय देते हुए बच्चों के इस काउंसलिंग सेंटर को संचालित करूँगा. इसे किसी भी प्रकार का मेडिकल काउंसलिंग जैसा स्वरूप ना देते हुए एक मनोरंजक केंद्र के रूप में विकसित करने की इच्छा है.उस के लिए नाम भी सोचा हुआ है- ” मस्ती की पाठशाला”. ईश्वर ने चाहा तो यह केंद्र शीघ्र ही मूर्त रूप लेगा. इंदौर की एक प्रख्यात एलोपैथी चिकित्सक डॉ श्रीमती गोयल के श्रीमान जी श्री अरुण गोयल जी मेरे अभिन्न मित्र हैं. उन्हों ने डॉक्टर श्रीमती गोयल के क्लीनिक पर ही एक कक्ष इस निमित्त देने का आश्वासन दिया है.आने वाले वर्ष में शीघ्र ही मस्ती की पाठशाला आकार ले लेगी, जहां मनोवैज्ञानिक कारणों से अवसाद ग्रस्त बच्चों, अत्यधिक क्रोध करने वाले बच्चों अथवा अंतर्मुखी हो जाने वाले बच्चों को ध्यान में रख कर उन से लगातार बातचीत और काउंसलिंग के द्वारा उन्हें सामान्य आचरण व्यवहार में ढालने का एक छोटा सा उपक्रम प्रारंभ होगा. आप सब मित्रों का स्नेह और आशीर्वाद मिला तो शीघ्र ही इस काम को प्रारंभ कर सकूंगा.

राजकुमार जैन राजन बालसाहित्य के क्षेत्र में एक जानामाना नाम हैं. आप अब तक नौ लाख से अधिक की पुस्तकें खरीद कर बच्चों में बांट चुके हैं. आप स्वयं एक बालसाहित्यकार है. बच्चों के बीच कहानी कार्यशाला करना आप का प्रिय शौक हैं. आप हजारों रूपए के बालसाहित्य के पुरस्कार हर वर्ष साहित्यकारों को बांट कर उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.आप का कहना है, ” इस वर्ष मैं 25 से अधिक विद्यालयों में पुस्तकों के वितरण करने के साथसाथ काव्यसंग्रह, बालकहानी संग्रह सहित चार पुस्तकें बालकों को स​मर्पित करने का प्रयास करूंगा. ताकि बालसाहित्यकार व बच्चों के बीच अच्छा कार्य हो सकें.”

 

‘बच्चों को देश’ पत्रिका के संपादक प्रकाश तातेड़ का कहना है , ” इस वर्ष मैं सलिला संस्था में सहयोग देते हुए तीन महत्वपूर्ण कार्य करूंगा.पहला—इस वर्ष मैंने मेरी बाल कविताओं का प्रथम संग्रह प्रकाशित करने का लक्ष्य बनाया है जिसकी कम से कम 100 प्रतियां निशुल्क बच्चों में बांटने की इच्छा है.  दूसरा— मैं वर्षपर्यंत अणुव्रत विश्वभारती राजसमंद में आयोजित बच्चों के शिविरों में उपस्थित रहता हूं. करीब 600 बच्चों के संपर्क में आता हूं. यदि कोई सदस्य अपनी बाल साहित्य की कोई पुस्तक उन बच्चों तक पहुंचाना चाहे तो बच्चों का देश के पते पर 10 -10 प्रतियां भिजवाएं. मैं सही पात्र तक पहुंचाने में मदद कर सकता हूं.  तीसरा— अभी मैं बच्चों का देश पत्रिका के संपादन से जुड़ा हूं, इस पूरे वर्ष यह सेवा जारी रखने को संकल्पित हूं.  साथ ही मेरा प्रयास रहेगा कि वरिष्ठ रचनाकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकारों को भी हर अंक में स्थान मिले.

अंजली खेर गृहिणी व बालसाहित्य लेखिका है. उन का कहना है कि मैं पुस्तक मेले से अच्छे बाल साहित्य की पुस्तकें खरीदूंगी. फिर उन्हें साल भर में बच्चों के जन्मदिन पर, घर आने वाले परिचित और परिजनों के बच्चों को उपहार में दूंगी. पुस्तके देते समय ये जरूर कहूंगी कि पढ़ कर बताइएगा कि इस पुस्तक की कौनसी कहानी अच्छी लगी और क्यों ?

विमला नागला पेशे से शिक्षिका और कहानीकार है. इन्हों ने कुछ विद्यालयों में  बरामदा पुस्तकालय का निर्माण किया है. इन के पास जो भी पुस्तकें आती है वे इन पुस्तकालयों में भेंट कर देती है. इन्हों ने अपने कहानी संग्रह की साठ पुस्तकें विभिन्न विद्यालय और बच्चों को दी है. ये बच्चों के बीच कहानी कहना और उन से कहानी सुनना पसंद करती है.आप का कहना है कि इस बार विभिन्न विद्यालयों के लिए कई पुस्तकें भेंट कर ने और बच्चों में विभिन्न गतिविधियों के द्वारा बच्चों के ​बहुमुखी प्रतिभा के विकास के लिए साल भर प्रयास करेंगी.

राजेंद्र श्रीवास्तव पेशे से शिक्षक और काव्य रचियता है. आप ने इस वर्ष जिला शिक्षाधिकारी की अनुमति ली है. वे प्रति शनिवार किसी विद्यालय में पहुँच कर प्रधानाध्यापक की सहमति से लगभग चालीस मिनट बालसभा में सहभागिता करते हैं. बच्चों की प्रस्तुति के बीच किसी बाल साहित्यकार की कहानी कविता का वाचन और सामान्य ज्ञान विषयक प्रतियोगिता आयोजित करवाते हैं.इस वर्ष आप ने संकल्प लिया है. वे कुछ बाल नाटिकाओं का मंचन करेंगे. नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण विषयक कुछ रोचक क्रियाकलाप जिससे बच्चों के मन में इनके महत्व व उपयोगिता विषयक अवधारणाएं स्पष्ट हो सकें. आप की मंशा है कि बच्चों में मौलिक सृजन व  अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास हो सके. इस के लिए वे बच्चों की कार्यशाला आयोजित करने की इच्छा रखते हैं.

डॉ विमला भंडारी हर वर्ष बाल​साहित्य के लिए कोई न कोई विधा पर बालसाहित्य पर आधारित आयोजन करवाती है. कई साहित्यकारों पुरुस्कृत कर के प्रोत्साहित करती है. बच्चों की कार्यशाला आयोजित करती है. बच्चों के बीच रहना और उन्हें पुरस्कार के रूप में पत्रपत्रिकाएं व पुस्तकें उपहार में देना आप का शौक है.वे कहती है,”  ये बच्चे कहीं ना कहीं कार्यशाला में मुझ से जुड़े हैं . उन की बातें, उन की समस्याएं, उन का भोलापन, उन के प्रश्न यहां से लेखन को पोषण मिलता है तथा नव प्रयोग के विचार भी. बाल साहित्य लेखन और उन का प्रकाशन का कार्य तो मैं निरंतर करती हूं. ये सब अपनी जगह है किंतु मंच पर कभी भी मुझे जब बोलने का अवसर मिलता है तो मैं बालक की स्थिति पर अवश्य बात करती हूं. उस की शिक्षा को ले कर खासतौर से जो आजकल स्थिति है बालकों में संस्कार देने के लिए चेतना जाग्रत करने का कार्य अपने उद्बोधन से करती हूं. ताकि देश का बालक एक संवेदनशील, सुयोग्य नागरिक बने.”इस वर्ष और भविष्य में भी बच्चों के लिए कार्यशाला, उन्हें पुस्तकें उपहार में देने और उन में प्रतिभा विकास का कार्य दूने उत्साह और स्फूर्ति से करती रहूंगी.

डॉ. सत्यनारायण सत्य बच्चों के लेखक हैं. इन का कहना है कि मैं लेखन के साथसाथ इस वर्ष कोशिश करूंगा कि मेरा विद्यालय, जहां पर मैं कार्यरत हूं वहां पर अधिक से अधिक बाल साहित्यिक पत्रिकाएं मंगवा कर, उन्हें बच्चों तक वितरित करने का प्रयास कर संकू .इसी कल्पना को साकार करते हुए मैंने अपने विद्यालय में बाल वाटिका, चंपक, देवपुत्र ,बच्चों का देश, नंदन बालहंस ,नन्हे सम्राट, बालभारती सहित देश की कई प्रतिष्ठित बाल पत्रिकाओं को मंगवाना शुरू कर दिया हैं. अब बच्चे इनका इंतजार भी करते हैं, पढ़ते भी हैं. इस वर्ष इस का विस्तार करूंगा. ताकि बच्चों में पाठ्य सहगामी गतिविधियों को विस्तार कर सकूं.

कुसुम अग्रवाल बच्चों की सर्वाधिक चर्चित बालकथाकार है. उन का कहना है कि मैं ने भी वर्ष 2020 में बालसाहित्य के उन्नयन हेतु कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं. मैं भारत पहुंचते ही बालकों की साहित्य में रुचि बढ़ाने हेतु कुछ कदम उठाऊंगी. लेखन कार्यशालाओं का आयोजन करूंगी.  इस वर्ष में इन्हें अधिक विस्तार दूंगी. मैं बच्चों को अपनी लिखी हुई कहानियां व कविताएं सुनाऊंगी  तथा अणुव्रत विश्वभारती के साथ जुड़ कर बच्चों के बहुमुखी विकास के लिए कार्य करूंगी. यह मेरा इस वर्ष का लक्ष्य और संकल्प है.

शील कौशिक प्रसिद्ध लघुकथाकार के साथसाथ कई कार्यक्रमों की संयोजक भी है. इस वर्ष वे बच्चों के विद्यालय में जा कर बच्चों से संवाद, वार्तालाप और कार्यशाला कर के बच्चों में पठनपाठन के प्रति रूचि जागृत करने का प्रयास करेंगी. आप का कहना है कि जो बच्चे वास्तव में हिंदी बाल साहित्य लेखन में रुचि रखते हैं, उन्हें कार्यशालाओं के माध्यम से कहानी, कविता विधाओं के अतिरिक्त अन्य विधाओं यथा संस्मरण, यात्रा वृतांत ,पत्र लेखन, रेखाचित्र, नाटक ,एकांकी आदि के बारे में सूक्ष्म बातें बताई जाएं, ताकि वे अपनी अभिव्यक्ति अपनी पसंद अनुसार किसी भी विधा में दे सकें .आप ने अपने संकल्प को क्रियांवित करने के लिए महादेवी कौशिक बालसाहित्य संस्थान का गठन किया है जिस के अंतर्गत नव वर्ष के शुरू में ही कार्यशाला का आयोजन 7 जनवरी से 11 जनवरी तक कर रही है.  इस कार्यशाला में 11 स्कूलों के 66 बच्चे भाग ले रहे हैं.आप का कहना है कि वर्षभर बाल साहित्य सृजन के अतिरिक्त बच्चों के हित में अन्य कार्य भी करती रहूंगी ताकि एक नई युवा पीढ़ी हिंदी बाल साहित्य लेखन की तैयार हो सके.

 चाँद मोहम्मद घोसी प्रसिद्ध काटुर्निस्ट है. आप का कहना है कि मैं नन्हेंमुन्ने बच्चों को अंकों से, एल्फाबेट्स से,अक्षरों व रेखाओं से सरल, सूंदर चित्र बनाना सिखा कर अध्ययन के प्रति उन में रुचि जागृत करने का प्रयास करता रहूँगा.

 

गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’ नवयुवा साहित्यकार है. इन का कहना है कि वर्तमान समय में मोबाइल, लैपटॉप और टी वी की प्रधानता के कारण बच्चों में बालसाहित्य पढ़ने की रुचि में कमी आई है. स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम प्रधान होने के कारण हिंदी बालसाहित्य को प्रोत्साहन न के बराबर है.“ मेरी सोच है कि बालसाहित्य की पहुँच अधिकांश बच्चों तक होनी ही चाहिए. मैंने यह निश्चय किया है कि वर्ष 2020 में बाज़ार से हर माह 30 बालपत्रिकाएँ खरीदकर आस-पड़ोस के साधनहीन बच्चों को वितरित करूँगा. साथ ही वर्ष 2020 में बालकविताओं का अपना प्रथम संकलन इस तरह प्रकाशित कराऊँगा जिस पर कम से कम लागत आए और जिसे साधनहीन बच्चों में मुफ्त वितरित किया जा सके और अधिक से अधिक बच्चों तक वह पहुँच सके.”

इंद्रजीत कौशिक जानेमाने कहानीकार है. आप का कहना है कि इस वर्ष में अपने संपर्क में आने वाले बच्चों से मिल कर उन से विचारविमर्श करूंगा. तब उन के सुझाए गए विषयों पर लेखन करने का प्रयास करूंगा. ऐसा करने से शायद बच्चों की जिज्ञासाओं के अनुरूप लेखन करने में सहायता मिले. वे बच्चे के बीच जाकर एक कार्यशाला आयोजित करना चाहते हैं.

ललित शौर्य वर्तमान समय में सब से अधिक छपने वाले युवा कहानीकार है. आप का कहना है कि  मैंने विगत वर्ष अपने प्रथम बालकहानी संग्रह—दादाजी की चैपाल, को शहर के सक्षम लोगों एवं नगर पालिका के माध्यम से 1500 गरीब बच्चों के हाथों तक पहुंचाया। इस वर्ष भी दो हजार प्रतियों का द्वितीय संस्करण आ रहा है। जिसे विभिन्न लोगों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। इस वर्ष एक अंग्रेजी में बालकहानी संग्रह आएगा जिसे भी गरीब बच्चों को निःशुल्क वितरित करने की व्यवस्था करूंगा. यह मेरा इस साल का संकल्प है.आप के प्रिय रचनाकारों ने इस वर्ष अपनेअपने लक्ष्य, बालसाहित्य और बालकों के लिए अपने दाइत्वों का संकल्प ले लिया है. आप सभी बालक और उन के मातापिता अपने बच्चों के लिए क्या संकल्प लेना चाहते हैं. यह आप तय कर लीजिए ताकि आप भी इन रचनाकारों की तरह अपना दाइत्व का इस वर्ष बखूबी निर्वहन कर सकें.

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    Omprakash Kshatriya 2 years

    बहुत सुन्दर प्रस्तुतिकरण और संयोजन । हार्दिक अभिनंदन ।

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    Dr Gulabchand Patel 2 years

    बाल साहित्य पर परिचर्चा एक उम्दा कार्य को पब्लिश करके बहुत सारे बाल साहित्य प्रेमी ओ तक पहुंचाया है, हार्दिक बधाई देते हैं

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    Kusum Agarwal 2 years

    श्री ओम प्रकाश क्षत्रिय जी की इस परिचर्चा द्वारा बाल साहित्य के उन्नयन हेतु कई बाल साहित्यकारों की संभावी योजनाओं पर प्रकाश डाला है। अतः यह बात तो सिद्ध हो गई है कि हम सभी बाल साहित्य में बहुत सी संभावनाएं देख रहे हैं। मुझे आशा ही नहीं अपितु पूरा विश्वास है कि यह सब शीघ्र ही क्रियान्वित होंगी।

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    ललित शौर्य 2 years

    सभी के संकल्प एक से बढ़कर एक हैं। आपका प्रयास स्तुत्य है। शुभकामनाएं।

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    राजेन्द्र श्रीवास्तव 2 years

    अभिनव पहल। बाल-जगत में एक सकारात्मक सोच का विकास होगा। उपेक्षा व भटकाव से उबर कर समाज में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकेंगे।

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    अंजली खेर 2 years

    नूतन वर्ष में नवीन पहल और सकारात्मक संदेश प्रसारित करने हेतु ओम प्रकाश जी का हार्दिक अभिनंदन । निश्चित हीं इस अभिनव पहल से समाज में नई पौध को सही दिशा मिलेगी ।

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    प्रकाश तातेड़ उदयपुर 2 years

    समसामयिक विषय पर अच्छी परिचर्चा। इस बहाने सभी बाल साहित्यकारों को अपना वार्षिक लक्ष्य निर्धारण और उसका निर्वहन करने अवसर मिला। ऐसे आयोजन प्रेरक और उपयोगी सिद्ध होते हैं। बधाई।

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    Gajanan Bhagat 2 years

    अभिनव पहल व नव संकल्प हेतू श्री ओम जी व अंजलि जी को वंदन अभिनन्दन,असीम शुभ कामनाएं
    गजानन भगत

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      अंजली खेर 2 years

      आत्मिक आभार दादा

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    इंद्रजीत कौशिक 2 years

    ओम प्रकाश जी की अच्छी एवं सार्थक पहल सभी बाल साहित्यकारों के विचार स्तुत्य है ।

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    आज के दौर मे मोबाईल और television ने बालमन पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाला है। बालसाहित्य उन्हे नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच की तरफ ले जाने का बहुत ही अच्छा माध्यम है।

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      अंजली खेर 2 years

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

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    Prachi sapre 2 years

    आप सभी का यह कदम बहुत सराहनीय है

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    Omprakash Kshatriya 2 years

    मेरे सभी साहित्यकार साथियों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं ।आप ने बाल साहित्य और बच्चों के लिए इस साल बहुत कुछ नया करने के लिए संकल्प लिया । यह हम बाल साहित्यकारों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
    यह संकल्प आने वाले समय में बाल साहित्य और बच्चों को बहुत कुछ देकर जाएगा, ऐसी आशा की जा सकती है। मगर, यह तो भविष्य के गर्भ में ही छुपा है कि हम क्या कुछ अनोखा और नया करवके इस समाज और साहित्य को कुछ दे पाएंगे ? इस की प्रतीक्षा ही की जा सकती है।

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