Wednesday 21st April 2021

कठिन है अभिनय दिखाना

कविता*सुषमा दीक्षित शुक्ला

छूपा निज उर शूल को कितना कठिन है मुस्कुराना ।
पहन अभिनय का मुखौटा , कठिन है अभिनय दिखाना ।

आह ! इक अंदर समायी इस दर्द को है कौन जाना !!
कर्मपथ के पथिक बनकर दो कदम है रोज जाना ।

इस विषमयी संसार से सदप्रेम का अमृत लुटाना ।
निज वेदना को मारकर है शान्ति का दीपक जलाना ।

छुपा निज उर शूल को कितना कठिन है मुस्कुराना ।
पहन अभिनय का मुखौटा, कठिन है अभिनय दिखाना ।

निज मायका ससुराल का अरु देश का गौरव बढ़ाना ।
एक नारी का धरम बस हर तरह से अब निभाना ।

इस गहन तम को भेदकर इस पार से उस पार जाना ।
अग्नी परीक्षा की विजेता बन तुम्हारे पास जाना ।

छुपा निज उर शूल को कितना कठिन है मुस्कुराना ।
पहन अभिनय का मुखौटा , कठिन है अभिनय दिखाना।

*सुषमा दीक्षित शुक्ला
  बहराइच

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