Wednesday 21st April 2021

गाता अपना गीत  हूँ

*दोहे*हमीद कानपुरी*

लफ़्फ़ाज़ों के हम नहीं, बन सकते हमराज़।
करना  होगा  अब हमें , एक नया आग़ाज़।
 
गाता अपना गीत  हूँ , रही अलग आवाज़।
दुनिया में  सबसे अलग, है अपना अंदाज़।
 
दिल की  बस्ती में कहीं, उमड़ा है  तूफान।
आँसू बह बह  कर  रहे , सारा दर्द  बयान।
 
संसद से  मैदान तक, हर  नेता  ग़मख्वार।
फिरभी जीना हो रहा,मुफलिस का दुश्वार।
 
*हमीद कानपुरी
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COMMENTS

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    अब्दुल हमीद इदरीसी 1 year

    शुक्रिया

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