Wednesday 21st April 2021

जाने जीवन किस ओर चला

कविता *सुषमा दीक्षित शुक्ला

पल की सुधि में युग बीत गए ,

जाने जीवन किस ओर चला !!

जिस पल से मन के मीत गए ,

जाने दर्पण किस ओर चला !!

वो माँग सिंदूरी श्वेत हुई ,

जाने यौवन किस ओर चला !!

है लाली चूनर तार-तार ,

जाने कंगन किस ओर चला !!

वो मीठी बातें प्रियतम की ,

वो मधुर मिलन किस ओर चला !!

जिस पल से मन के मीत गए ,

जाने दर्पण किस ओर चला !!

*सुषमा दीक्षित शुक्ला,बहराइच 

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