Wednesday 21st April 2021

झारखंड का समाजवादी चुनाव

*नवेन्दु उन्मेष*

जनवादी कवि गोरख पांडे ने अपनी कविता में कहा है- ‘समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आयी, हाथी पर आयी, घोड़ा पर आयी, अंग्रेजी बाजा बजायी हो बबुआ। समाजवादी धीरे-धीरे आयी हो बबुआ।‘ इसी तर्ज पर कहा जा सकता है कि झारखंड में समाजवादी चुनाव चल रहा है। इस चुनाव में तरह&तरह के समाजवादी रंगदेखने को मिल रहे हैं। चुनाव में अपराधियों को पकड़ने वाले पूर्व पुलिसअधिकारी भी खड़े हैं और अपराधी भी। भ्रष्टचार पर अंकुश लगाने का जिन पर जिम्मा था वे भी चुनाव में खड़े हैं और भ्रष्टाचारी भी खड़े हैं। जो नक्सली कभी जनअदालत लगा कर सरेआम जनता का सिर कलम कर दिया करते थे वे भी चुनाव में जनता की अदालत में आ गये हैं। जिन पर बैंक को सुरक्षित रखने का जिम्मा था वे भी चुनाव में खड़े हैं और बैंक लूटने वाले भी चुनाव के मैदान में हैं। जो कभी मुख्यमंत्री की कैबिनेट में मंत्री थे वे अब उन्हें चुनाव मैदान में चुनौती दे रहे हैं और उन्हें रघुवर दास की जगह रघुवर दाग बता रहे हैं। यह भी कह रहे है कि रघुवर दाग को मोदी डिटर्जेट भी नहीं साफ कर सकता और न ही अमित शाह की लौड्री में उसकी धुलाई संभव है। हालांकि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि दाग अच्छे हैं।

हालांकि इस चुनाव में प्रेमिका की हत्या करने वाले भी खड़े हैं और प्रेम विवाह करने वाले भी खड़े हैं। राजा भी खड़े और रंक भी खड़े हैं। वैसे लोग भी खड़े हैं जो कभी झामुमो को गालियां दिया करते थे वे झामुमो के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। जो कभी कांग्रेस में रह कर धर्मनिरपेक्षता का राग अलापते थे और भाजपा को साम्प्रदायिक पार्टी का दर्जा देते थे वे भी भाजपा की झोली में आकर भाजपा को विकासवादी और धर्मनिरेपेक्ष पार्टी बता रहे हैं। जैसे ही भाजपा ने उन्हें टिकट दिया उनके लिए भाजपा साम्प्रदायिक से धर्मनिरपेक्ष पार्टी में बदल गयी। जो लोग कभी कांग्रेस, राहुल तथा सोनिया की आलोचना किया करते थे वे कांग्रेस में आकर कह रहे हैं कि देश को सोनिया और राहुल की जरूरत है। यह सब चुनावी टिकट का कमाल है। टिकट मिलते ही साम्प्रदायिक पार्टी भी धर्मनिरपेक्ष हो जाती है और धर्मनिरपेक्ष पार्टी भी साम्प्रदायिक हो जाती है। कहा जा सकता है कि यह सब शक्ति चुनावी टिकट में ही होती है जो गलत को भी अच्छा बता सकती है और अच्छा को भी गलत। जो लोग कभी आजसू पर भाजपा की पूछ पकड़कर बैतरणी पार करने का आरोप लगाया करते थे वे स्वयं आज आजसू की चैखट पर टिकट मांगने जा चुके हैं। इससे पता चला है हकीकत में झारखंड में समाजवाद आ रहा है। यह सभी दल और सभी नेता
समाजवादी हो चुके हैं। किसी भी दल या नेता में कोई मतभेद नहीं हैं। मतभेद तो सिर्फ पांच साल के लिए है। मतभेद चुनाव के बाद शुरु होने वाला है और अगले चुनाव तक आते-आते मतभेद दूर हो जायेगा। इस प्रकार पूरा झारखंड चुनाव के वक्त ही समाजवादी हो जाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि झारखंड में समाजवादी चुनाव चल रहा है।

*नवेन्दु उन्मेष

सीनियर पत्रकार

दैनिक देशप्राण

रांची, झारखंड

संपर्क-9334966328

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