Sunday 5th December 2021

दास्ताने इश्क है उन को सुनानी आज फिर

ग़ज़ल *हमीद कानपुरी

साथ मिलकर  ईद होली  है मनानी आज फिर।
प्यार  की  गंगा  हमें  यारो  बहानी  आज फिर।
 
खोल दी है  याद की इक  इत्रदानी  आज फिर।
दास्ताने  इश्क है उन  को सुनानी   आज फिर।
 
एक  रूमानी  ग़ज़ल है  गुनगुनानी आज फिर।
हो गयी है इक ज़रा सी बद गुमानी आज फिर।
 
हाँकने फिर  से लगे  हैं  लनतरानी  आज फिर।
बात  नेता   कर रहे  हैं  आसमानी  आज फिर।
 
आग नफरत की उन्हे शायद लगानी आज फिर।
हो  रही  इतिहास  से है  छेड़खानी आज फिर।
 
है  नहीं  चर्चा  तलक   उम्मीदवारी   की   कहीं,
उसको भारी पड़ रही हैे बदज़बानी आज फिर।
 
देख कर मौसम सुहाना और तेवर  दिल नवाज़,
याद आयी  है मुहब्बत की कहानी  आज फिर।
 
ले  रहा  है   इम्तिहां  पर   इम्तिहां वो   रोज़ ही,
प्यार की ताक़त  उसे  है आज़मानी आज फिर।
 
जिस  कहानी  में  सभी थे  बाप माँ  भाई बहन,
याद मुझको  आ रही है  वो कहानी आज फिर।
 
बेबसी  ही   है  कराती   ऊँचे  नीचे   काम  सब,
दिख रही  ख़तरे उठाती  ज़िन्दगानी आज फिर।
 
उसके आने  का असर हर शाख़ पर ऐसा हुआ,
खिलखिला कर के हँसी है रातरानी आज फिर।
 
कुछ नया कर   के दिखाना  चाहती है  ज़िन्दगी,
जोश  से  भरपूर  है  यारो  जवानी  आज फिर।
 
अनगिनत   होते  यहाँ हैं  रेप  मर्डर  आये दिन,
ज़ुर्म की  दिल्ली बनी  है राजधानी  आज फिर।
 
दूसरे  की   बात   सुनने   को  नहीं   तैय्यार  वो,
सोच उसकी  हो गयी है तालिबानी  आज फिर।
 
बेईमानी के लिये  जिसको  निकाला  कल गया,
मुल्क की करने  लगा वो  बागबानी आज फिर।
 
है कोई तकलीफ़ ऐसी जिसको कह सकतीनहीं,
आँखउसकी दिख रही हैे डबडबानी आजफिर।
 
क्या लगाऊँ  मिसरा ऊला  सोचता है  अब यही,
होगया है उससे पहले मिसरा सानी आज फिर।
 
सुब्ह उठकर काम में  मशगूल हो  जाओ हमीद,
धाकअपनी इस जहां में गर जमानी आज फिर।
 
देखकर  तस्वीर  तेरी   एक  एलबम  में  हमीद,
याद  आयी    ख़ूबसूरत   मेज़बानी  आज फिर।
 
*हमीद कानपुरी
 कानपुर
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