Wednesday 21st April 2021

दिन सुहाना रात सुहानी न मिटा पाओगे

*विक्रम कुमार

दिन सुहाना रात सुहानी न मिटा पाओगे 
चाहे कुछ भी कर लो कहानी न मिटा पाओगे 
घिस लो हाथ तुम भी पर याद रखो इतना 
निशान ही मिटेंगे निशानी न मिटा पाओगे
 
रूप पर तुम्हारे वो पहरा है मेरा अब तलक
तेरी आंखों में बसा चेहरा है मेरा अब तलक
तुम लाख सितम ढा़ओ चाहे मुझे भुलाओ
पर रिश्ता तेरे दिल से गहरा है मेरा अब तलक
मैं मिटूंगा मेरी जवानी न मिटा पाओगे
निशान ही मिटेंगे निशानी न मिटा पाओगे
 
चाहे दिल ये मेरा सरे राह उछाल दो तुम
चाहे गिरा दो मुझको चाहे संभाल दो तुम
यादें हमेशा मेरी दिल में तेरे बसेगी
चाहे दिल में रखो चाहे निकाल दो तुम
यादों को मेरी तुम जानी न मिटा पाओगे
निशान ही मिटेंगे निशानी न मिटा पाओगे
 
*विक्रम कुमार,मनोरा, वैशाली
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