Wednesday 21st April 2021

नया एक साल आ रहा

कविता *अलका 'सोनी'

 
दे दो बिदाई खुलेमन से
साल ये पुराना 
है जा रहा
खट्टे मीठे यादों के मोती
पथ पर लुटाता 
वो जा रहा
 
हंसने, मुस्कुराने के कितने 
बहाने उसने थे दिए
दामन में बीते उन पलों को
समेटे साल है
ये जा रहा
 
सजा लो फिर से तुम
मन का आंगन
खुशियों के तोरणद्वार से
मना लो उनको रूठे हैं जो
थोड़े प्यार और मनुहार से
 
पल-पल सन्देशा यही देता
हाथों से फिसलता
ये जा रहा
सजा लो मन का आंगन
कि नया साल फिर
है आ रहा
 
*अलका ‘सोनी’
बर्नपुर ( प. बंगाल)
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    Alka soni 1 year

    रचना को प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार सम्पादक महोदय का।

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