Wednesday 21st April 2021

नया साल

लघुकथा*प्रो.शरद नारायण खरे


“राकेश ,तुम सुबह-सुबह कहां जा रहे हो ?”

“अंकल जी,नमस्कार ।हैप्पी न्यु इयर ।अरे अंकल जी,आज नये साल का पहला दिन है,इसलिए मैं अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामजीलाल के पैर छूकर उन्हें बधाई देने व उनसे आशीर्वाद लेने जा रहा हूं ।”

“ओह,बहुत ख़ूब ।पर इसी शहर में तुम्हारे मम्मी-पापा भी तो रहते हैं,क्या उनसे मिलकर उनका आशीर्वीद ले लिया ?”

“आप भी गजब करते हैं वर्मा अंकल।पापा-मम्मी के आशीर्वाद का क्या ,वह तो मिलता ही रहता है ।पर नये साल पर पार्टी के नेशनल प्रेसीडेंट का आशीर्वाद और मेहरबानी मेरे पॉलिटिकल कैरियर के लिए तो बहुत ज़रूरी है ।”

“हां,शायद तुम ठीक कह रहे हो,राकेश ।”

“वो क्या है अंकल कि अध्यक्ष जी के घर सुबह से ही सारे यूथ लीडर्स बुके,फूलमालाओं और गिफ्ट के साथ इकट्ठा होंगे ।ऐसे में,अगर मैं न पहुंचा तो क्या मेरा इम्प्रेशन ख़राब नहीं हो जाएगा ?और क्या मेरा कैरियर इफेक्टेड नहीं हो जाएगा ? ”

“राकेश ,यू आर राइट” वर्मा अंकल ने उदास होकर मन ही मन उसके कैरियर को लानत भेजते हुए कहा ।”

*प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
CATEGORIES

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )