Sunday 18th April 2021

नववर्ष आया

कविता *मीरा सिंह "मीरा"

पलकें बिछी जाजिम बिछा
कर रहे सपनें रतजगा
जा रहा कोई होकर विदा
आ रहा कोई साथी नया
गजब है दुनिया का मेला
मिलन बिछड़न का है खेला
कानों में चुपके कह गई हवा
आने को है मेहमान नया
मौसम भी है कुछ खुशनुमा
महकी महकी सी है वादियां
चंद लम्हों की है ये  दूरियां
बेताब सी लगती है पंखुड़ियां
सज गए हैं स्वागत द्वार
झंकृत हुए हैं हृदय के तार
सखी खोल मन के किवाड़
नववर्ष आया है तेरे द्वार ।

*मीरा सिंह “मीरा”
  डुमराँव, जिला- बक्सर, बिहार 

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