Wednesday 21st April 2021

प्याज, पराली, पाकिस्तान, पवार, प्राईवेटाइजेशन में उलझा रहा वर्ष 2019

*विनोद कुमार विक्की*

वर्ष 2019 का कैलेंडर चक्र बीस उन्नीस के फेर में ही उलझा रहा।प्याज, पराली, पाकिस्तान, पवार,प्राईवेटाइजेशन इस साल का सबसे चर्चित शब्द रहा।ऐसी ऐसी घटनाओं का पदार्पण और निष्पादन हुआ कि जनता कभी दांत चिंहाड़ कर हँसती तो कभी आँख पसार कर रोती।

साल की शुरुआत में 46 शहीदों की चिता पर छप्पन इंच की छाती वाले ने सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2 का सीक्वल बनाकर पाक को अवाक कर दिया।हालाँकि आतंकी की लाश पर मातम पूर्सी मनाने एवं चौथा विधान करवाने की उम्मीद में कुछ ‘हमारे अपने’ छप्पन इंच वाले से पचपन तरह के सवाल सबूत करते रहें। वर्ष की शानदार ब्लाॅक बस्टर घटना रही संसदीय चुनाव।ईवीएम ने फिर हाहाकार मचाया और अच्छे दिन के काॅपीराइट वाले पार्टी की सरकार बन गई। देश की मासूम जनता ने  छः हजार प्रतिमाह के प्रपोजल को ठुकराकर एक बार पुनः पंद्रह लाख की बकाया राशि वाले सरकार को देश की बागडोर सौंप दी ताकि इस सेशन में उनका बैंक एकाउंट गरम हो जाय। कमल के मित्र रहे ‘शत्रु’ सहित विपक्ष खामोश रह गई।मोटा भाई पार्टी के  मैनेजमेंट से सीधा मंत्रालय में एंट्री कर गए।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज साहब के “आर्डर-आर्डर-आर्डर “उद्घोष से विचलित होने वाले वकील की तरह शौहर के “तलाक-तलाक-तलाक” उद्घोष से खौफज़दा रहने वाली बेगम में तीन तलाक कानून से स्फूर्ति का संचार हुआ तो शौहर मियाँ में ख़ौफ का प्रसार।
वर्ल्डकप क्रिकेट 2019 से भारत की वापसी में माही की भूमिका एवं  इंग्लैंड को विजेता के रूप में घोषित करने में निर्णायक की भूमिका दोनों ही चर्चा का विषय बना रहा। लुढ़कते ढुलकते ही सही पहली बार कप और क्राऊन एक दूजे के हुए।
भारत से पल्स पोलियो की तरह ही सात दशक पुरानी धारा 370 का उन्मूलन भी इस वर्ष कर लिया गया।कुछ ‘हमारे अपने’ एवं अलगाववादी नेता व्यथित और व्यग्र हुए तो ‘शुभचिंतक पड़ोसियों ‘के पेट में लेबर पेन वाला मरोड़ भी उत्पन्न हुआ। अमेरिका से लेकर यूएन तक इमरान चचा का विधवा विलाप जारी रहा तो देश में ढेर सारी पार्टी के बीच मातम पसरा रहा। 
हालांकि इस घटना क्रम पर अमेरिकी ट्रंप मामू ने बेवजह ही मध्यस्था की बात कर दाल भात पर मूसलचंद बनने का असफल प्रयास किया किन्तु बाद में सच सामने आने से लज्जित ट्रंप चचा “हाउडी मोदी हाउडी मोदी” का ट्रंपेट बजाते दिख गए।
सुशासन प्रदेश में इस साल बारी बारी से कभी अस्पताल,कभी सरकार तो कभी नगर निगम बीमार पड़ा। चमकी बुखार से स्वस्थ सरकार में चमक बढा तो वर्षाजल के घुटना भर पानी के कारण अपने आवास में तीन दिनों तक द्वितीय मोदीजी फंसे रहे। बहरहाल नरक निगम की हाइटेक तकनीक के कारण राजधानी के लोग एक पखवाडा तक कमर भर पानी में वाटर पार्क का मुफ़्त में लुत्फ़ लेते रहे। सरकार की हर घर पानी योजना की महत्वाकांक्षा को बरसाती जल ने पुरी करने में महती भूमिका निभाई।
इस साल प्रदेश में शराबबंदी की अपार सफलता के बाद(होम डिलीवरी सदृश लीकेज/पाइरेसी को छोड़कर) गुटखाबंदी मोशन पिक्चर्स रिलीज हुआ।दशकों पुरानी रजनीगन्धा एवं तुलसी की जोड़ी को सुशासन प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया गया। हालाँकि साहब के उक्त निर्णय से हमारे अधिकांश नशेड़ी एवं तलबदार बिहारी भाई तनिक भी विचलित नहीं हैं क्योंकि जिसप्रकार शराबबंदी के बाद नशा के अन्य विकल्प यथा सिगरेट,गांजा,भांग,खैनी सेवनकर्ता के लिए कानूनन उपलब्ध है वैसे ही रजनीगन्धा एवं कुछ अन्य कंपनी के तम्बाकू के उत्पाद के अलावा शेष कंपनियों का तम्बाकू उत्पाद तलबदारों के लिए सुलभ रहेगा।( वैसे भी जब होम डिलीवरी का गैर कानूनी प्रावधान है तो काहे का टेंशन)
इस साल हमारे फ्लाई मिनिस्टर साॅरी प्राइम मिनिस्टर साहब का अधिकांश समय विदेश यात्रा की बजाय स्वदेश में ही बीता। देश में इस साल मोदीगिरी से ज्यादा मंदीगिरी एवं मोटागिरी सुपरहिट रहा।
भले ही देश में निजीकरण, बेरोजगारी एवं मंदी का ग्राफ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से ज्यादा उंचा रहा हो किन्तु देश वासियों को सिर्फ पड़ोसी देश की समस्या ही नजर आई। शुक्रिया है न्यूज़ चैनल वालों का जिन्होंने हर दिन पाकिस्तान की तबाही,तंगहाली और कंगाली वाली खबरों को प्राइम टाइम में दिखाकर फील गुड इंडियन का अनुभव कराया।
इस साल जेएनयू के टुकड़े गैंग वाले होनहारों ने स्वामी विवेकानंद को भगवा रंग से रंग दिया तो बीएचयू के धर्मांध संस्कारों ने मुस्लिम शिक्षक का बहिष्कार कर साबित कर दिया कि चाल चरित्र से जेएनयू और बीएचयू “डाॅट डाॅट मौसेरे भाई” ही हैं।
निर्भया की सुरक्षा में फेल मुफ़्त बिजली,मुफ़्त पानी एवं मुफ़्त इंटरनेट के नाम पर बनी मफलर धारी सरकार ने महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री कर दी। वर्तमान कलयुगी न्यायिक व्यवस्था ने वर्ष 2019 में आखिरकार त्रेतायुुुगी न्याय प्रिय श्री राम के लंबित विवाद का न्याय निर्णय कर दिया। त्रेता युग के चौदह वर्षीय वनवासी को सुप्रीम कोर्ट ने 485 वर्ष के कलियुगी गृह निकासी के पश्चात इस वर्ष आवास मुहैया कराने का आदेश दे दिया।
इस साल हमारे धरना मैन ने किसानों की पराली पद्धति के बारें में लोगों का जेनरल नाॅलेज मजबूत किया और उन्हें बताया कि शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, वाहन आदि की अपेक्षा पराली से राजधानी की खुशहाली प्रदूषित हो रही है।
इस साल बेरोजगार पकौड़ा संघ की आंखें भरी भरी रही।सरकार ने रोजगार के एवज़ में पकौड़ा बेचने की योजना का शिलान्यास तो कर दिया था किन्तु पकौड़ा का राॅ मैटेरियल प्याज इतना मंहगा हो गया कि बेरोजगारों का एकमात्र सहारा ‘पकौड़ा रोजगार’ भी पकड़ से बाहर हो गया।
दुकान से रसोई तक प्याज ने बिना छीले ही जमकर आंसू निकलवाए।सदैव इंडियन करेंसी के आगे मजबूत रहने वाला अमेरिकी डॉलर प्याज के सामने कमजोर पड़ गया और प्याज की बढी कीमत ने मुर्गा-मुर्गी की औसत आयु में कुछ दिनों का इजाफा कर दिया। भले ही प्याज रसोई से नदारद रहा हो किन्तु फेसबुक,ट्वीटर,संंसद और साहित्यकारों की रचनाओं में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहा।
महाराष्ट्र चुनाव के हाइ वोल्टेज ड्रामा ने पुरे देश की जनता का भरपूर मनोरंजन किया।पवार के पावर ने शाह को भी मात दे दिया।सरकार बनाने का लाॅलीपाप दिखाकर नेताजी ने कुछ ही घंटों में विपक्षी दल के साथ जोड़ जुगाड़ कर मोटा भाई को लोटा थमा दिया।जिस टेक्निक पर अभी तक मोटा भाई अपनी कमल खिला रहे थे पहली बार उन्ही की तकनीक से उनको मात देते हुए पवार जी ने हाथों में धनुष-बाण थमा दिया।
यूपी, बिहार,आंध्र प्रदेश में महिलाओं के साथ गैंगरेप एवं जिंदा जलाने का सीक्वल चलता रहा।इन घटनाओं पर चेतना शून्य मानवाधिकार आयोग एवं तथाकथित सेकुलरवादी नेताओं की कुंभकर्णी चेतना साल के अंतिम महीना में तब उफान मारने लगी जब चार कर्मवीर सरकारी मेहमान हैदराबादी पुलिस के सीन रिक्रिएशन में दुनिया से एलिमिनेशन को प्राप्त हो गए।हालाँकि एक महिला पशु चिकित्सक के साथ इन वीर बाँकुड़ों ने जो कृत्य किया था उसके लिए इन्हें सिलाई मशीन और मौद्रिक सहयोग का लाभ मिलना तो तय था।
पिछले वर्ष रानी पदमावती की तो इस वर्ष सूरजमल के चरित्र वाली चलचित्र ने बवाल करवाया कहने का आशय यह है कि पिछले वर्ष बॉलीवुड के अलाउद्दीन खिलजी ने तो इस बार अहमद शाह अब्दाली ने जमकर उत्पात मचाया।
साल की अंतिम ब्लाक बस्टर रही नागरिकता संशोधन बिल। सीएबी 2019 ने मंहगाई,मंदी,बेरोजगारी से पीड़ित जनता को हिन्दुत्व का होम्योपैथी ट्रीटमेंट दिया। हालाँकि सीएबी2019 को बिना समझे जाने ही अधिकांश पार्टी के आस्तिक भक्त जयजय कार में लग गए तो अधिकांश पार्टी विरोधी नास्तिक ‘हुआ हुआ’ करनेे लगे।
मोटा भाई की हरकतों से तथाकथित सेकुलरिस्ट एवं अल्पसंख्यक समुदाय त्राहिमाम करते दिखें तो मंदी, मंहगाई बेरोजगारी से पीड़ित बहुसंख्यक समर्थक आत्ममुग्ध हो ‘मेरा भारत महान’ का मल्हार करता दिखा।
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि वर्ष 2019 (निम्न ग्राफ वालेे आर्थिक विकास,जीडीपी एवं रोजगार आदि मुुद्दा को ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद में छोड़कर) प्याज, पराली, पाकिस्तान, पवार, प्राईवेटाइजेशन,मोटागिरी,मंदीगिरी एवं मंहगाई के इर्दगिर्द ही चक्कर काटता रहा।

*विनोद कुमार विक्की ,खगड़िया (बिहार)

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