Sunday 5th December 2021

बगावत

कविता *मीरा सिंह 'मीरा'




बगावत

सलीब पर लटका दो
या दीवार में चुनवा दो
तुम्हारे तख्तो ताज से
हम नहीं डरने वाले
आग के दरिया में
डूब कर निकल जाएंगे
दर्द के सहरा में भी
खुशी के गीत गाएंगे
मुरदो में प्राण फूंकेंगे
सोए को जगाएंगे
बेनूर सी आंखों में
उम्मीद बन मुस्कुराएंगे
गूंगे की फरियाद बनेंगे
अन्याय से टकराएंगे
सिर पर कफन बांधकर
घर से निकले हैं हम
मौत की आहट सुन
हरगिज़ न लौट पाएंगे
सूली पर चढ़ा दो  हमें
या सर कलम करा दो
मर्जी है तुम्हारी हुजूर
चाहे तुम जो सजा दो

*मीरा सिंह “मीरा”
 डुमरांव, जिला- बक्सर बिहार



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