Wednesday 21st April 2021

ये पत्नियाँ

*संजय श्रीवास्तव 'प्रज्ञा'*

सचमुच बहुत कमाल की होती हैं पत्नियाँ
कैसी अजब पहेली ये होती हैं पत्नियाँ
घर में न हों तो काटने को दौडता है घर
घर में रहें तो काटने दौडे ये पत्नियाँ

सच ही कहा है प्यार अंधा होता है भाई
शादी के बाद आंखें खुलाती हैं पत्नियाँ
प्याज और पत्नि दोनों एक जैसे हैं
प्याज आँसू देती रुलाती हैं पत्नियाँ

शादी के पहले भटके थे जिनकी तलाश में
शादी के बाद वे ही सताती हैं पत्नियाँ
सूर्य चन्द्र ग्रहण जैसा पाणिग्रहण है
जिसमें पति को ग्रहण लगाती हैं पत्नियाँ

इंसान हुआ करता था मैं शादी के पहले
अच्छे भलों को गधा बनाती हैं पत्नियाँ
उस वक्त कभी पत्नि से पंगा नहीं लेना
जब लौटकर के मायके से आती हैं पत्नियाँ

सारी कमाई महीने भर की छीन लेती हैं
मेकप में सारी पुंजी उडाती हैं पत्नियाँ
दस बीस रुपये जब भी “प्रज्ञा” माँगकर देखो
तो ठुल्लू बाबाजी का दिखाती हैं पत्नियाँ
                                               
*संजय श्रीवास्तव ‘प्रज्ञा’
गंजबासौदा,जिला – विदिशा ( म. प्र.)

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