Sunday 5th December 2021

रे मन तू लौट के आजा

गीत*भारती शर्मा

बावरा मन चला किस ओर
चला किस ओर…न कोई छोर
रे मन तू लौट के आजा
रे मन तू लौट के आजा

गति चंचल, मति चंचल
थाह कोई बूझ न पाये
करे क्यूँ अपनी मनमानी
समझ में कुछ नहीं आये
चले तुझपे न कोई जोर
रे मन तू लौट के आजा

बहुत निर्मल, बहुत कोमल
न कोई ठेस लग जाये
छुपा लूँ आ जहाँ से मैं
कोई तुझको न बहकाये
चुरा न ले कोई चितचोर
रे मन तू लौट के आजा

बने कितने ही अफसाने
या तू जाने या रब जाने
मेरे भावों का तू दर्पण
जो देखे वो ही पहचाने
बँधी तुझसे ये जीवन की डोर
रे मन तू लौट के आजा

 
*भारती शर्मा, अलीगढ़
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
CATEGORIES

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )