Wednesday 21st April 2021

लो बसंत के दिन अब आए

कविता*डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’

सरसों फूले टेसू महके,
आम्र तरु मंजरी बौराए,
लो बसंत के दिन अब आए।

कोयल कूके मयूर है नाचे,
भ्रमर कलि संग गुनगुनाए,
लो बसंत के दिन अब आए।

बासंती बयार सखि को,
प्रिय का संदेश पहुंचाए,
लो बसंत के दिन अब आए।

हरियाली और फूलों से,
प्रकृति का दामन भर जाए,
लो बसंत के दिन अब आए।

मदमस्त बसंत के मौसम में,
सजनी साजन संग सुहाए,
लो बसंत के दिन अब आए।

चहुं दिशाएं सुरभित हो जाए,
प्रकृति संग मानव हर्षाए,
लो बसंत के दिन अब आए।

*डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’
मण्डला

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