Wednesday 21st April 2021

अच्छी नींद सफलता और तंदुरुस्ती का खजाना

अच्छी नींद सफलता और तंदुरुस्ती का खजाना

लेख*सोनी जैन

दोस्तों क्या आपको नींद बहुत देर से आती है ?…8 से 10 घंटे की नींद लेने के बाद भी आप थके थके से रहते हैं ?…अचानक कुछ मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है?…किस आयु में हमें कितनी नींद लेनी चाहिए?…नींद सफलता और सेहत का खजाना क्यों है ?…नींद के कौन – कौन स्तर होते हैं ?…सपने हमें नींद के किस स्तर पर आते हैं?…बिस्तर गीला करना,नींद में चलना नींद के किस स्तर पर होते हैं?…शारीरिक – मानसिक थकान का हमारी नींद के स्तरो पर क्या प्रभाव पड़ता है?…ब्लू लाइट का हमारी नींद क्या प्रभाव पड़ता है?…कैसे एक अच्छी नींद आप ले सकते है?



नींद को लेकर ऐसे बहुत से सवाल हमारे जहन में रहते हैं उनका जवाब मिलना बहुत जरूरी है। इसलिये आज नींद के ऊपर बात करेंगे। दोस्तों अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा नींद में ही निकाल देते हैं और यह बहुत जरूरी भी है क्योंकि स्वस्थ शरीर एवं मस्तिष्क के साथ लंबा जीवन जीने के लिए नींद बहुत जरूरी है। दोस्तों नींद का अर्थ केवल सोना ही नहीं है क्योंकि नींद की अवस्था में कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण कार्य होते हैं जो कि हमारी जागृत अवस्था में संभव नहीं है।चलिए समझते हैं दोस्तों – हमारे शरीर में दो प्रकार के प्रोसेस होते हैं एनाबॉलिक एंड कैटाबॉलिक प्रोसेस। इन्हीं से हमारा मेटाबॉलिज्म बनता है। सरल शब्दों में समझें तो एनाबॉलिक प्रोसेस के अंतर्गत नए नए cell एवम टिशूज बनते हैं तथा अंगो को रिपेयर भी करते हैं। नींद एक एनाबॉलिक प्रोसेस होता है जो स्वयं ही शरीर को रिपेयर करता है,इसीलिए एक अच्छी नींद दोबारा आपको तरोताजा कर एनर्जी से भर देती है। इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करती हैं हारमोंस स्तर बैलेंस होता हैं। आप अपने आप को यंग और एनर्जेटिक महसूस करते हैं तथा आपका दिमाग भी शांत होता है ।नींद में मिलने वाले इतने सारे फायदों के कारण यह कहा जाता है यह सफलता की कुंजी और सेहत का राज है।हमारी नींद पूरी नहीं होती तो हमारा दिमाग बहुत बहुत थक जाता है, कमजोर हो जाता है क्योंकि मस्तिष्क को उसकी खुराक यानि ग्लूकोस 6% तक कम मिलता है इसी कमी को पूरा करने के लिए अक्सर हमें अचानक से ही मीठा खाने की इच्छा जागृत होती है।



दोस्तों क्या आप जानते हैं भगवान ने हमारे शरीर में नेचुरल बॉडी ब्लॉक फिट की है जो कि हमें बताती हैं कि हमें कब जागना है और कब सोना है।इस नेचुरल बॉडी क्लॉक को सर्काडियन रिदम (circadian rhythm) कहते हैं। जो कि हमारे हाइपोथैलेमस में होती है।वस्तुतः हाइपोथैलेमिक से एक नसों का गुच्छा होता है। जिसे की सुपरकियास मैटिक न्यूक्लियस (scn)कहा जाता है।यह हिस्सा लाइट और टेंपरेचर को पहचानता है।
असल में दोस्तों हमारी यह बॉडी क्लॉक 24 घंटे के अनुसार सेट होती है ।जैसे जब अँधेरा होता हैं तो हमारी आंखों के द्वारा इसे संकेत मिल जाता है कि रात हो गई और यह ऐसे हार्मोन शरीर में बनाने लगता है जो कि दिन में नहीं बनते। मेलाटोनिन हार्मोन इसी तरह का एक हार्मोन हैं। इसके कारण ही हमें नींद आती हैं।जिन लोगों में ये हारमोंस डिस्टर्ब होता है उनकी नींद भी डिस्टर्ब हो जाती है। नींद में ही हमारा शरीर ग्रोथ हार्मोन बनाता है जो कि हमारे शरीर की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है,साथ ही ये हार्मोन हमे यंग औऱ एनरजेटिक बनाये रखते है।
यदि आप समय से नहीं सोते तो आपकी माइंड और बॉडी में रात के समय बनने वाले हार्मोन आपको नहीं मिल पाते और बहुत सारी समस्याओं जैसे डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, डिप्रेशन,मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम, बाइपोलर डिसऑर्डर होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।



दोस्तों बॉडी क्लॉक आपके रूटीन के हिसाब से सेट हो जाती है। जिस तरह के संकेत हम अपने बॉडी क्लॉक को देते हैं उसी के हिसाब से यह सेट हो जाती है जैसे कि हम रोज 10:00 बजे सोते हैं और 6:00 बजे सोकर उठते हैं तो हमारी बॉडी क्लॉक इसी के अनुसार सेट हो जाती है। लेकिन जिन व्यक्तियों का कोई सोने का समय निश्चित नहीं होता उनकी बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाती है और भी बहुत सारी नींद संबंधित परेशानियां शुरू हो जाती है। हम सोचते हैं कि 8 घंटे की नींद लेने के बाद भी हम बहुत थके थके रहते हैं।क्या कारण है? टाइम – बेटाइम की नींद से बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाती है जिसके कारण नींद में मिलने अनगिनत लाभों से आप वंचित रह जाते हैं। और थके थके रहते है।



इसलिए दोस्तों हमें अपनी नींद का समय अवश्य ही निश्चित करना चाहिए और अपनी आयु के अनुसार नींद लेनी चाहिए जैसे बच्चों को तकरीबन 17 घंटे किशोरों को 9 से 10 घंटे और व्यस्को को लगभग 8 घंटे। लेकिन यहां यह भी जानना जरूरी है कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए 3 घंटे की नींद भी पर्याप्त होती है।
दोस्तों आपको कुछ सवालों के जवाब तो मिल गए होंगे लेकिन अभी हमें नींद के विभिन्न स्तरों को समझना बाकी है ताकि और सवालों के जवाब में मिल जाए ।लेकिन वह समझेंगे हम अगले लेख में।

*सोनी जैन, मेरठ
(स्वतंत्र लेखिका मनोविज्ञान विशेषज्ञ)


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