Wednesday 21st April 2021

चीन न जाने का सुख

व्यंग्य*सुरेश सौरभ

आज से कुछ माह पूर्व मेरे एक मित्र मुझसे मिलने घर आए और कहा-अगर चीन जाना चाहो तो चले जाओ बड़ा अच्छा मौका है। वहां बहुत अच्छा वेतन मिलेगा। मेरे कई जानने वाले वहां जा रहे हैं। हिंदी पढ़ाने वालों को तो वहां बहुत ही अच्छा पैसा मिलता है। मैंने कहा-जाना तो मैं भी चाहता हूं कहीं बाहर, यहां कुछ अच्छा पैसा नही दे रहे प्राइवेट कालेज वाले। तब वे मुझ पर करूणा दिखा कर बोले-अगर जाना हो तो जल्दी बताना। मैंने बेचारगी से कहा-मेरे पास फिलहाल पासपोर्ट नहीं है मित्र। पासपोर्ट बनवाने में बहुत पचड़े हैं भाई। देखता हूं, अगर कहीं आसानी से बन गया तो जाने की सोचूंगा। वे पासपोर्ट-वीजा बनावाने के नये आसान नियम कायदे समझाते हुए, मेरी जागती आंखों को चीन की रंगीनियों की सैर कराते हुए चले गए।



मैं सोचता रहा, अगर आकर्षक वेतन के साथ, कहीं चीन जाने का मौका मिल गया तो पूरे मोहल्ले में पहला ऐसा सौभाग्यशाली आदमी मैं हो जाऊंगा। जब अडोस-पड़ोस में लोग-बाग यह जानेंगे तो अपुन को, इज्जत से सर-आंखों पर बिठा लेंगे और घर-परिवारी लोग तो इस खुशी में झूमते हुए बड़े प्यार से, दुलार से एअरपोर्ट तक छोड़ आयेंगे। खैर आज बनवाऊंगा कल बनवाऊंगा अपने इसी निठल्लेपन के कारण पासपोर्ट बनवाने का कार्य रोज-ब-रोज लंबित करता चला गया।



उसके कुछ समय बाद वुहान शहर से उठे, पूरी दुनिया में कहर बरपाते, भारत तक पहुंचते कोरोना के कहर को जब टीवी में देखा तो कलेजा मुंह को आ लगा। तब अपने दिल को तसल्ली देते हुए कहा, “अच्छा हुआ नहीं गये लाले! वर्ना अपना भी नाम शहीदों में लिखा जाता या कहीं बचकर आ भी जाते, तो मेरे पड़ोसी यह जानकर पुलिस वालों को फौरन फोन करके कहते-जल्दी इसे यहां से निकाल कर आइसोलेशन में ले जाओ। वर्ना यह नामुराद पूरे मोहल्ले में कोरोना की शै-बला को फैला देगा। तब अपने सनातन धर्म का पालन करते हुए पुलिस वाले मुझे घर से खींच कर ले जाते और पूरी कालोनी में विदेश से लौटकर आने वाले अपने रौब और रूतबे का एकदम फालूदा बन जाता। दिल को बहलाने के लिए गालिब ख्याल अच्छा है। घर की आधी खाओ पूरी पाने के लिए विदेश न दौड़ों-भागों बुजुर्गों का यही विचार अच्छा है। यही सोच कर मैं अपने मायामोह से फंसे चंचल मन को बहुत-दिनों से समझा-बुझा रहा हूं।

*सुरेश सौरभ,लखीमपुर खीरी


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
CATEGORIES
TAGS

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )