Wednesday 21st April 2021

देश जल रहा है

कविता*उर्मिला शर्मा



देश जल रहा है

बचा लो अपनी आत्मा को
देश के ऐ हुक्मरानों !
आखिरी ये मौका है
जो मर गयी ये तो ढ़ोते फिरोगे
जिंदा लाश अपने ही कन्धों पर
‘बो’ नफरतों के बीज
लड़ा रहे हो अपनो को,अपनो के ही बीच
जल रहा है देश तेरा 
ताप रहे बैठे तुम सुरक्षा घेरा
करोगे कितनी राजनीति धर्म, जाति पर
चलोगे कितनी नीच तुम कूटनीति
कभी कराते नापाक विद्या के मंदिर को
कभी मचाते तांडव सड़क के बीचों- बीच
क्यों कहें ब्रितानियों को हम बुरा
तुम भी तो कर रहे वही बनके भला
भरा पड़ा अतीत है दंगो के वृत्त से
अब और न बढ़ाओ इसका बोझ कृत्य से
बस करो! बुद्ध, महावीर औ गांधी की धरा पर
यही उपहार दोगे क्या अपनी संतति को?
कहीं न कह उठे पीढ़ी तुम्हारी
अब पढ़ना नहीं इतिहास तुम्हारा
अब गढ़ना है इतिहास हमारा ।।
 
*उर्मिला शर्मा, हजारीबाग



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