Sunday 18th April 2021

एक नया इतिहास रचना है

कविता*उमा पाटनी'अवनि'




जी हाँ सो जाने दो उसे हमेशा के लिए
गहरी नींद कि उठ न पाये फिर कभी वो
कोई आहट नहीं, सुरबुराहट नहीं
सन्नाटे की घनी परत बिछा दो
खामोशियों का ढोल बजा दो
किसी को वो छू न पाये
शान्त सड़कों पर शिकार तलाशता
थक कर इस कदर चूर हो जाये
कि आंख लगे तो दुबारा उठ न पाये
दोस्तों जीत का बिगुल बजाना है
कोरोना को हराना है
कोई न रहे चपेट में इसकी
हम भारतवासियों ने बहुत सी जंग जीती है
और आपसी तालमेल संग
बिना एक-दूसरे से गले मिल
दिलों से दिल को मिलाना है
दुआ करनी है अपने लिए, सबके लिए
बस कुछ भी हो
हर हाल वादा निभाना है
हमको इस लड़ाई में एकमत हो
फिर से एक नया इतिहास रचना है।

*उमा पाटनी’अवनि’
पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)



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