Wednesday 21st April 2021

एलएस स्ट्रोन की भारत यात्रा

एलएस स्ट्रोन की भारत यात्रा

कहानी*ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

वुहान से हवाईजहाज में सवार हुआ एस स्ट्रोन कोरोना वायरस ने कहा, ” एल स्ट्रोन ! क्यों न भारत की सैर की जाए ?”
” हां यार ! सही कहते हो। भारत एक खुबसूरत देश है,” एस स्ट्रोन कोरोना वायरस ने कहा, ” उस व्यक्ति को देखो। वह व्यक्ति भारत जा रहा है। उसी पर सवार हो जाते हैं,” कहते हुए एस स्ट्रोन हवा के झोंके के साथ उड़ा। सीधा उस के सिर के बाल पर सवार हो गया।
” अरे ! इस का नाम तो बुहानू है,” एल ने उस व्यक्ति का पासपोर्ट देखते हुए कहा।
” हमें नाम से क्या लेनादेना है ? हमें तो इस के जरिए भारत की सैर करना हैं, ” एस स्ट्रोन ने हवाईजहाज के बाहर देखते हुए कहा। तब तक हवाईजहाज वुहान से उड़ चुका था।
एल और एस दोनों खुश थे। उन्हें भारत की सैर करने का सुख मिलने वाला था। इस कारण वे बुहानू के साथ भारत आ रहे थे। मगर बुहानू के सिर पर सवार होने से पहले ही वे पूरे हवाईजहाज में अपने बहुत सारे वायरस छोड़ चुके थे।



हवाईजहाज तेजी से उड़ रहा था। कुछ ही देर में भारत आ चुका था। बुहानू जल्दी में था। उस ने हवाईअड्डे पर जांच नहीं करवाई। वह सीधा अपने घर पहुंचा गया। मगर, वह सावधान था। घर पर पहुंच कर उस ने आवाज दी, ” अरे बेक्टो बेटा ! तुम कहां हो ?”
तभी घर के अंदर से आवाज आई, ” पापाजी ! दरवाजा खुला है। अंदर आ जाओ।”
इस पर बुहानू बोला, ” बेटा ! मैं अंदर नहीं आ सकता हूं। पहले तुम नहाने का पानी और साबुन दो। मैं बाहर बैठ कर नहाऊंगा। उस के बाद घर के अंदर आऊंगा।”
यह सुन कर एस स्ट्रोन चौंका। उस ने कहा, ” अरे एल! सावधान हो जाओ। यह व्यक्ति तो नहा कर अंदर जाएगा। साबुन लगते ही हम मर जाएंगे। इसलिए अपना बचाव का उपाय सोच लो।”
” जी हां, तुम सही कहते हो एस,” एल ने कहा,” तब क्या करें ?”
” करना क्या है ?” एस बोला, ” वह सामने दरवाजे का हैंडल है। उस पर उड़ कर बैठ जाते हैं। कम से कम मरने से बच जाएंगे।”
” मगर, कैसे ?” एल ने कहा तो एस बोला, ” अभी बताता हूं।” कहते हुए एस ने बुहानू के माथे पर जोर से कांट लिया।
बुहानू के माथे पर तेज दर्द हुआ। वहां खुजली चली। उस ने अपने हाथ से माथे पर खुजालना शुरू किया। तब एल व एस उस के हाथ पर चढ़ कर बैठ गए। इस के बाद बुहानू ने दरवाजे का हैंडल पकड़ा। वहां रखा पानी लिया। तब तक एस व एल हैंडल पर जा कर चिपक चुके थे।
” ओह ! बच गए, ” एल ने लंबी सांस ले कर कहा तो एस बोला, ” हां भाई। यदि हम सावधान न रहते तो मर जाते। यह व्यक्ति तो बहुत ही सावधान रहता है। हमें घर के अंदर तक जाने नहीं देना चाहता है।



” यदि हम घर के अंदर नहीं जाएंगे तब तक दूसरे के शरीर में नहीं फैलेंगे। जब तक दूसरे के शरीर में नहीं फैलेंगे तब तक हम भारत की सैर कैसे कर पाएंगे?”
”ठीक कहते हो भाई। यदि हम सैर नहीं करेंगे तो हम भारत कैसे घुमेंगे। वैसे तो हमारे फैलाएं हुए कण यहांवहां फैल चुके है। जो काम हम नहीं करेंगे वे हमारी फौज करेगी,” एल ने कहा, ” तुम तो जानते हो कि इस व्यक्ति के शरीर में घुस कर हम ने कितने विषाणुओं की फौज पैदा कर ली है।”
” मगर, उन की बात मत करो,” एस ने कहा, ” हमें भारत की सैर करना है। इसलिए मौक ढूंढ कर घर में घुसने की तैयारी रखो।”
” जी भाई, मौका मिलते ही मैं यही करता हूं,”कहते हुए एल ने सामने देखा।घर में से एक लड़का बाहर आ रहा था। उसे देख कर एल चिल्लाया, ” वह देखो। वह लड़का हमारा आसान शिकार हो सकता है। हम उस पर सवार हो कर हमारी तादाद बढ़ा सकते हैं।”
तभी बुहानू ने चिल्ला कर कहा, ” बेक्टो ! वही रूक जाओ। इस दरवाजे के कूंदे को मत छूना। इस पर वायरस हो सकते हैं,” बुहानू ने दरवाजा खोलते हुए कहा।
बेक्टो अंदर ही रूक गया। बुहानू ने दरवाजा खोला, ”जरा अंदर से सैनेटाइजर की शीशी ले कर आना। इस से कूंदा साफ करना पड़ेगा। यहां पर वायरस हो सकते हैं।”
यह सुन कर बेक्टो अंदर से सैनेटाइजर की शीशी ले कर आ गया।



” इसे जमीन पर रख दो।” बुहानू ने कहा। फिर जमीन से शीशी उठाई। उस में से दवा ली। दवा से कूंदा साफ करने लगा। तभी एल चिल्लाया,” भाई ! यहां से उछलों। बुहानू की शर्ट कूंदे पर अड़ चुकी है। उस पर लग जाओ। अन्यथा, हम मारे जाएंगे।” कहते हुए एल बुशर्ट पर कूद गया।
एस भी तैयार था। उस ने भी बुहानू के बुशर्ट पर छलांग लगा दी।
” ओह ! बच गए।”
” अब हम इस के साथ इस के घर में प्रवेश कर जाएंगे,” एल ने कहा और वह खुश हो कर उछलनेकूदने लगा।
बुहानू ने घर के अंदर प्रवेश किया। तब उस ने अपने हाथ सैनेटाइजर से साफ किए। फिर वह बेक्टो को शीशी दे कर बोला, ” अब तुम्हारे हाथ भी इस से साफ कर लो।” कहने के साथ उस ने बेक्टो को शीशी दी। तब तक एल हवा के झोंके से उड़ कर बेक्टो के हाथ पर चिपक चुका था।
” जी पापाजी,” बेक्टो ने कहा,” मैं तो साबुन से हाथ धोऊंगा, ” कहते हुए वह स्नानघर में चला गया। वहां जा कर उस ने साबुन से हाथ धोए। इधर एल सावधान नहीं था। वह नहीं जानता था कि साबुन से हाथ धोने से क्या हो सकता है ? वह हाथ पर बैठा रहा।
मगर, यह क्या ? वह हाथ पर बैठाबैठा घबराने लगा। साबुन का झाग उस के लिए जहर था। उस ने एल के प्रोटीन का कवच को टुकड़ेटुकड़े कर दिया।



” अरे बाप रे! यह क्या हो रहा है ?”वह चींख कर उछला। तब तक उस ने कई विषाणु बेक्टो के हाथ में फैला दिए थे। मगर, वे साबुन के झाग में फंस कर मर गए। मगर एल तुरंत उछल कर बुशर्ट पर चढ़ चुका था इसलिए बच गए।
बेक्टो हाथ धो कर कमरे में आया। उसे भूख लग रही थी। उस ने पापाजी को आवाज दी। दोनों खाना खाने लगे। एल को लगा कि यह अच्छा समय है। इस के खाने में कूद कर इस के शरीर में पहुंच सकता हूं।
यह सोच कर वह रोटी पर कूद गया। मगर, यही उस की सब से बड़ी गलती थी। बेक्टो ने रोटी का टुकड़ा उठाया। सब्जी में डूबा कर मुंह में डाल लिया। सब्जी गरम थी। रोटी गरम थी। उस की गरमी से उस का कवच पिघल कर नष्ट हो गया। वह गरमी से बिखर कर मर गया।
एस यह देख कर बहुत दुखी हुआ। उस ने सोचा था कि वे दोनों साथसाथ में भारत का भ्रमण करेंगे, मगर उस का सपना अधुरा रह गया था। इसलिए वह निराश हो गया। इस समय उस ने चुपचाप बुहानू के शर्ट पर पड़े रहना उचित समझा।
जैसे ही उसे मौका मिला वैसे ही वह बुशर्ट से नाक में घुस गया। उस ने नाक में घुस कर अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर दी। इस से बुहानू संक्रमित हो गया। मगर, वह सावधान था। उसे जैसे ही खांसी आई वह अस्पताल चला गया।



अस्पताल के कोरोना वार्ड में उसे भरती कर लिया गया। मगर, एस होशियार था। वह बुहानू के शर्ट से उछल कर एक नर्स के शरीर में चला गया। इस तरह उस ने अकेले ही अपनी भारत यात्रा शुरू कर दी। मगर, नर्स की रोगप्रतिरोधक क्षमता अच्छी थी उस के शरीर में स्थित श्वेत रक्त कणिकाओं ने उस का सफाया कर दिया।
एस ने नर्स में संक्रमण फैला दिया था। मगर, उस का अंत समय आ चुका था। वह धीरेधीरे कमजोर होने लगा। उस के भारत देखने का सपन अधुरा रह गया था। मगर, वह खुश था कि उस ने अपने विषाणुओं को भारत में फैलाना शुरू कर दिया था। मगर, उसे यही डर था कि यदि भारत वाले सावधानी रखेंगे तो उस की फौज भारत भ्रमण नहीं कर पाएंगी। वह चाहता था कि सभी भारतवासी घर से बाहर निकले ताकि वह फैल सकें। वे बारबार हाथ न धोएं ताकि सभी संक्रमण होते रहे।



यहां उलटा हो रहा था। सब भारतवासी घर में बंद है। वे बारबार हाथ धो रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति से दूर रह रहे हैं। इसलिए उस की फौज परेशान थी।
इधर एक धीरेधीरे मर रहा था।”भले ही मेरा भाई एस ज्यादा खतरनाक है मगर, वह अपने वंशज को बढ़ा कर लोगों को संक्रमित करेगा तो सही,” यह सोचते हुए एस की मौत हो गई।
इस तरह एलएस की हवाईयात्रा भारत में आ कर पूरी हो गई। मगर, उन का सपना पूरे भारत घुमने का अधूरा रह गया।

*ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
रतनगढ,जिला-नीमच (मप्र)



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