Wednesday 21st April 2021

वीर हैं, जो वीरों की तरह लड.चला

कविता*निशा अमन झा 




शहीदों का कोई मजहब नहीं होता !
वीर हैं, जो वीरों की तरह लड.चला , 
और आज वीरों की तरह
सीना चौड़ा कर चला ! 
सियासी सियासत करतें रहे ! 
वह नाम अमर कर चला, 
शोकपूर्ण ये वतनदारी नहीं ! 
जश्ने वतन कर चला , 
कतार में खड़े ओर भी हैं ! 
पर नाम पहला वो कर चला , 
नहीं चाहता शोक सभा  ! 
बस बेखौफ रहें भारत मेरा , 
बेख़बर हर जर्रा – जर्रा रहे  ! 
हर इंसान रहें  बेपरवाह !! 
*जयपुर राजस्थान
 



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