Wednesday 21st April 2021

जब आती है बैसाखी

कविता*रामगोपाल राही




तन थिरके मन हर्षे गावे,
मन भाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

गीत पंजाबी प्रीत पंजाबी ,
नृत्य पंजाबी होता है |
इठलाता मुस्काता जीवन ,
मीत पंजाबी होता है ||
खिल जाती है बाछें सचमुच ,
प्रीत जगाती बैसाखी  |
बाग बाग मन हो जाता है
जब आती है बैसाखी ||

कट जाती है फसल, -प्रसन्नता ,
नए साल की खुशियों में |
झूम झूम उठता है जीवन ,
गदगद होकर खुशियों में ||
है पारंपरिक पर्व साथ में ,
खुशियाँ  लाती बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

खुशियों का त्योहार अनोखा ,
ठौर ठौर पर मेले हों |
पंथ दिवस यह खालसा का ,
खुशियों भरे झमेले हों ||
पुण्य पावन कर्म भले के ,
होते ,आती बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है,
जब आती है बैसाखी ||

ऐतिहासिक पर्व कि जिसकी ,
गाथा अमर कहानी है |
पंच पियारे संग कई बातें ,
जिसकी अमर निशानी है ||
पावन स्मरण संग सभी को ,
हर्षाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

सिक्खों  का नववर्ष “खालसा ”
सम्मत समझो आरंभ हो |
नगर कीर्तन जुलुस -उत्सव ,
जगह जगह संयोजन हो ||
उत्साह व उल्लास हृदय में ,
भर जाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

आवत पौनी मेले जमघट
और भाँगड़ा नृत्य हो |
हर्ष से तन मन हो रोमांचित ,
जब पारंम्पिक नृत्य हो ||
आनंद सबके जीवन में सच ,
भर जाती है बैसाखी |
बाग बाग  मन हो जाता है,
जब आती है बैसाखी ||

सामाजिक त्योहार धर्म संघ ,
जिसकी बात अनूठी है |
भेदभाव को खत्म करना ,
इसकी नींव अनूठी है ||
अमृत संजीवन के लम्हे ,
दे जाती है  बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

मकर संक्रांति की भांति ही ,
महत्व पर्व का होता है |
पावन पुण्य परंपरा संग ,
,गर्व का अनुभव – होता है ||
बहुत धूम होती है इस दिन ,
जब आती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

अन्य राशि में -,सूर्य इस दिन ,
जाता  ,-उत्सव होता है ~|
सच बैसाखी संक्रांति का   ,
हर्ष का उत्सव होता है ||
दो मौसम का मिलन अनोखा ,
कर  जाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

धर्म प्रकृति परंपरा का ,
पर्व – प्यारा होता है |
गिद्दा का आनंद अनोखा ,
अद्भुत न्यारा होता है ||
और गंगा स्नान महत्व भी
समझाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

पावन सजते गुरुद्वारों में ,
हर्ष -आनंद होता है |
उमगे उमगे ह्रदय सभी में ,
अमृत आनंद होता है ||
अरदासों  का दौर भी अद्भुत ,
संग लाती है बैसाखी |
बाग बाग मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

गुरु -आशीर्वाद सभी को ,
कई को -,मन मीत मिले |
शकुन सभी को खुशियों – संग,
समझो आशातीत मिले ||
अमृत संवर्धन अनुभूति ,
-कर जाती है  बैसाखी |
बाग बाग  मन हो जाता है ,
जब आती है बैसाखी ||

लॉकडाउन कोरोना संकट,
आज  बड़ी मजबूरी है |
सोशल डिस्टेसिंग आपस में ,
रखना बहुत जरूरी है||
इस वर्ष घर पर ही बंदो
मन पाएगी बैसाखी |
बाग बाग मन कर जाती है ,
जब आती है बैसाखी ||

*रामगोपाल राही,लाखेरी


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