Wednesday 21st April 2021

क्षणिकायें

क्षणिकायें *राजेश’ललित’



मरना तो तय था!
आँखें धुँधला गईं,
तो देखता क्या??
दोस्त है कि दुश्मन,
ख़ंजर ने तो ख़ैर :
नहीं पहचाना:
धँस गया बस॥
 


 
 
तुम्हारी मुस्कराहट
का उधार
रहेगा ता-उम्र मुझ पर
तुमने आना छोड़ दिया
मैने मुस्कुराना छोड़ दिया।।
 
 
 


 
 
अपने आंसू ,
यूं न पी अभी;
दिल घुटने लगता है।
बह जाने दे इन्हें,
दिल का मोम पिघला है:
पता चलता है।।
 


 
जब तक पाँव
नंगे थे
नीचे सख़्त ज़मीन थी
ज़मीन का अहसास था
कंकड़ थे,पत्थर थे
दूब थी,घास था।                                                 
ज़मीन से जुड़ाव था
सब मन के आस-पास था
जूते पहने लगा मिट्टी से
दूर हो गया
अहसास मर गये
मैं मिट्टी का मिट्टी हो गया।।
*राजेश’ललित’, दिल्ली


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
CATEGORIES

COMMENTS

Wordpress (1)
  • comment-avatar
    राजेश’ललित’ 1 year

    शाश्वत सृजन के संपादक मंडल का आभार।

  • Disqus (0 )