Sunday 18th April 2021

मौसम बदल रहा है

कविता*अलका'सोनी'




वक़्त भी क्या खूब
बदल रहा है
कि जानवर और इंसान
साथ सड़कों पर
पल रहा है

ज़िंदगी भर काम
करके भी
बुढ़ापा यहाँ
दया में मिली
रोटी पर
पल रहा है

है धरती की हालत
बिगड़ी और
मानव चांद-तारों पर
कदम रख रहा है

लूट कर निरीह
जनता को सफेदपोश
दौलत घरों में अपने
भर रहा है

सम्हल कर रहा
करो ज़रा अब
बड़ी जल्दी यहाँ
मौसम बदल रहा है।

नसीहत की है
अब जरूरत किसको
जिसे, जो मर्ज़ी हो
वो कर रहा है।

*अलका’सोनी’,बर्नपुर,पश्चिम बंगाल



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COMMENTS

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    राजकुमार जैन राजन 1 year

    अच्छी रचना। हार्दिक बधाई

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