Wednesday 21st April 2021

मेरी कविता बासी नही

कविता*रेनू शब्दमुखर



मेरी कविता
कभी बासी नहीं पड़ेगी
थके हुए है जो उनको
अपने भावों से,आवेगों से
हौसला,जोश,नवस्फूर्ति दे
आसमान तक जाने की उर्जा दे
जीवन संघर्ष में निखार लायेगी
अब तो नही कहोगे कि
तुम्हारी कविता बासी हो पड़ेगी
ये आकाशभर सत्य है
मेरी कविता कभी बासी नही पड़ेगी
हाँ,तुमको आगे बढ़ते जाने को
उमंगों का एक जिंदा गीत दे
मुझे हर पल तुम्हारे जेहन में
जिंदा रख जीने को प्रेरित करेगी
सच मेरी कविता कभी बासी
नहीं पड़ेगी
मेरी कविता ताजी ओस की
निर्मल,पावन बूंद सा
नरम अहसास दे
तुम्हारे अंतर्मन को
मुझ तक प्लावित करेगी
और हाँ, जिंदगी जीने के नए
आयाम भी देगी
यही कविता मंजिल को कोशिश की चुनरिया पहना
अपनी किस्मत को स्वर्णिम बना
अपना रास्ता खोज ही लेगी
सच है कि मेरी कविता
कभी बासी नही पड़ेगी
और हाँ,एक बात कहूं
यही जीती जागती कविता
मेरे अंतर्मन का सच्चा लेख है
जब भी इन्हें पढ़ोगे
तुम्हें अपनी सी लगेगी
और भीगेंगी तुम्हारे साथ
तुम्हारी ताजगी की बरसात में
अब तो समझ गए हो कि
मेरी कविता बासी नही पड़ेंगी

*रेनू शब्दमुखर,जयपुर



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