Tuesday 18th May 2021

नमन करूँ मैं आपको,ओ मेरे नटराज

दोहे *कमलेश व्यास 'कमल'




महाशिवरात्रि पर्व विशेष

कंचन काया देखकर,मत करना अभिमान।
भस्म रमा शिव दे रहे, नश्वरता का ज्ञान।।

भस्म रमैया आप ही,मान,प्रतिष्ठा,लाज।
नमन करूँ मैं आपको,ओ मेरे नटराज।।

सीधे सरल स्वभाव के,शिवशंकर सुखसार।
टाले संकट सहज ही,सुमिरत हो भवपार।।

शिव जपते श्रीराम को,राम जपे शिव नाम।
जो जपते शिवराम को,सिद्ध सफल सब काम।।

तंत्र मंत्र अरु यंत्र से,बंधे न भोलेनाथ।
जो भक्ति निष्काम करे,उसका थामें हाथ।।

क्रोध कपट अज्ञान का,चलता फिरता कोष।
चरणों में रख लीजिए, तजकर मेरे दोष।।

शशि शोभित है भाल पर,गले भुजंग विशाल।
जटा बीच गंगा धरी,नीलकंठ विकराल।।

हो जाए शिव की कृपा,दर्प न करना आप।
नित सेवा करते रहो,करो न कोई पाप।।

मुश्किल सहज सरल बने,बने सहज सब काज।
तन मन धन सब आपका,रखना मेरी लाज।।

निराकार ओंकार है,शिवमय सब संसार।
जैसी जिसकी कामना,वैसा शिव आकार।।

*कमलेश व्यास ‘कमल’,उज्जैन


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