Wednesday 4th August 2021

नवप्रभात लाकर रहे,चलें अगर सब साथ

दोहे*डॉ नलिन




कितने संवत्सर गये,करलें यह प्रण आज।
भारत के मस्तक धरें,पुनः विश्वगुरु ताज।।

पूर्व दिशा में देख ले,कल सारा संसार ।
सदाचार के सूर्य से,जलता भ्रष्टाचार ।।

सागर कम गहरा लगे,कम ऊंचा आकाश ।
ऐसा फैले ज्ञान का,घर घर तीव्र प्रकाश।।

हम सबसे आगे रहे,बतलाता इतिहास ।
फिर क्योंकर करवा रहे,हम अपना उपहास।।

इधर -उधर क्यों देखना,खड़े करें क्यों हाथ।
नवप्रभात लाकर रहे,चलें अगर सब साथ ।।

*डॉ नलिन, कोटा



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