Sunday 18th April 2021

पानी बड़ा कीमती जग में

गीत*जय सिंह आशावत




खुली छूटती नल की टोंटी,
बह जाता है पानी ।
पानी बड़ा कीमती जग में ,
बात हमें समझानी।

घर-घर तक पीने का पानी,
शासन है पहुंचाता ।
पानी की टंकी से नल में,
सुबह शाम को आता ।
खुला छोड़ नल इसे बहाना,
है यह तो नादानी ।
पानी बड़ा कीमती जग में ,
बात हमें समझानी।

किसी नदी पर बांध बांध कर,
रोका सागर जाना ।
तब जाकर हम को मिलता है,
मीठा शुद्ध खजाना।
व्यर्थ बहाने वालों ने तो,
कीमत कब पहचानी ?
पानी बड़ा कीमती जग में ,
बात हमें समझानी।

तीन भाग है जल धरती पर ,
पर वह सब तो खारा ।
पीने लायक तो थोड़ा है ,
जिससे चले गुजारा।
जीव जगत की झूठ कल्पना,
अगर नहीं है पानी।
पानी बड़ा कीमती जग में ,
बात हमें समझानी।

बूंद बूंद से घड़ा भरे पर,
बूंद बूंद से खाली ।
दोनों का सिद्धांत एक है ,
करना है रखवाली ।
जब भी देखो खुला हुआ नल,
रोको बहता पानी।
पानी बड़ा कीमती जग में ,
बात हमें समझानी।

*जय सिंह आशावत,
नैनवाँ जिला बूंदी राजस्थान



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