Tuesday 18th May 2021

प्रदूषणराज की आपात बैठक

व्यंग्य*मीरा सिंह'मीरा'

प्रदूषण के प्रति लोगों की जागरूकता देख विषैले गैसों के दम फूलने लगे। सभी हानिकारक तत्व रात के सन्नाटे में एक आपात बैठक आहूत किए । कार्बन परिवार बहुत हतोत्साहित लग रहा था । प्रदूषणराज इत्मीनान से अपने सिंहासन पर विराजमान थे।बैठक की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मिथेन गैस चर्चा शुरू किया ” महाराज बहुत बुरी खबर है ।हमारे खिलाफ साजिश रची जा रही है। लोग गोलबंद हो रहे हैं ।हमें जड़ से उखाड़ फेंकने की योजना बना रहे हैं। शहर तो शहर ,गांव में भी हमारे खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ।गांव वालों को पराली मैडम का भी साथ मिल गया है। गली कुचे में सब ,जगह हमारे खिलाफ नारे लिखे जा रहे हैं। अगर इंसानों की यही तेवर रहे तो हमें शीघ्र ही इस धरती से अपना बोरिया बिस्तर बांध कर कहीं और कूच करना पड़ेगा ।”
नाइट्रोजन परिवार का मुखिया भी हां में हां मिलाते हुए कहने लगा ” हुजूर,ये श्रीमान सत्य फरमा रहे हैं।” पॉलिथिन सरदार भी अपना दुखड़ा रोने लगा “अब हम नदी के तटों से भी खदेडे जा रहे हैं। लगता है हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा ।अब फरियादी के रूप में चिमनी और टेंपू से उत्सर्जित काले धुएं की बारी थी जो अपना करिया मुंह लटकाए एक कोने में खामोश खड़ा था। दुखी स्वर में बोला “हुजूर, मैं भी बहुत परेशान हूं। हमारे ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है ।अब इ-रिक्शा और सी एन जी से गाड़िया चलने लगी है।धीरे धीरे हमारा नामोनिशान भी मिट जाएगा ।”



इस पर प्रदूषणराज जोर से ठहाका लगाकर हंस पड़े। यह देख वहां उपस्थित तमाम विषैले गैसों व कचरों के होश उड़ गए। सभी एक स्वर में पूछ बैठे “महाराज ,इस दुख की घड़ी में भी आप हंस रहे हैं?” इस पर वो मुस्कुराते हुए कहने लगे “अरे, तुम सब व्यर्थ चिंता कर रहे हो।अरे नादानों ,इन इंसानों से डरते हो?” कहते हुए व्यंग्य से मुंह सिकोड़े। फिर बात आगे बढाते हुए कहने लगे “इन इंसानों से, जो कहता कुछ है और करता कुछ है। जिसे अपनी सहूलियत और मुनाफे के सिवा कभी कुछ दिखाई नहीं देता।ऐसे इंसान से डरने की क्या जरूरत है? पता है– इंसानों की एक खास नस्ल होती है।बस्ती के लोग उसे नेता के रूप में जानते हैं। वे नेता हम लोगों की बिरादरी के ही होते हैं। इसीलिए उनकी बातों पर गौर करने की जरूरत नहीं है। जब तक धरती पर नेता रहेंगे,कोई हमारा बाल बांका भी नहीं कर सकता।धरती से खदेड़ना तो दूर की बात है।इस बात का मैं आश्वासन देता हूं।अरे भाई, उन्हें जिंदा रहने के लिए वोटों की जरूरत होती है और वोटों के लिए वे लोगों के दिल में उतरने का प्रयास करते हैं।इसके लिए लोकलुभावन कई प्रकार के अभियान चलाकर सुर्खियों में रहने का प्रयास करते हैं ।इन आयोजनों से वे लोगों का ध्यान अपनी कमियों से हटाने में सफल हो जाते है।अभी भी वही कर रहे हैं।जनता का ध्यान गरीबी और बेरोजगारी से हटाकर हमारी ओर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।इससे लोगों की नजरे मूल समस्या से इतर हम पर टिक जाएगीं। इस तरह वो हमारी ओट में अपनी कमजोरियों को छुपा देंगे । दो-चार दिन हो हल्ला होगा।फिर सब शांत हो जाएगा। इसलिए कहता हूं कि इस धरती से हमें भगा देना संभव ही नहीं नामुमकिन है। जब तक धरती पर एक भी इंसान रहेगा ,हमारी सांसे चलती रहेंगी। यही नहीं तुम लोगों को जानकर फक्र होगा कि हमारे कई भाई बंधु एवरेस्ट जैसे उच्चे पहाड़ों की चोटी पर अपने कुटुंब सहित सकुशल रह रहे हैं।मनुष्य जहां कहीं भी जाते हैं, हमें भी तो आपने साथ ले जाते हैं। भाईयों, ऐसे आत्मीय जनों से खौफ व्यर्थ है।आप बेफिक्र रहिए और मौज कीजिए ।” कहते हुए प्रदूषणराज ने सभा स्थगित कर दी।

*मीरा सिंह’मीरा’,बक्सर



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