Wednesday 21st April 2021

स्मृति शेष-

इंद्रधनुषी व्यक्तित्व श्री रतनलाल सी. बाफना

इंद्रधनुषी व्यक्तित्व श्री रतनलाल सी. बाफना

लेख*डॉ.दिलीप धींग

समाजसेवी, प्रसिद्ध शाकाहार-प्रचारक, विलक्षण गोसवी एवं धर्मनिष्ठ श्रावक श्री रतनलाल चुन्नीलाल बाफना का जीवन एक ऐसा इन्द्रधनुष था, जिसमें मात्र सात ही नहीं, अपितु अनेक रंग चमकते थे। एक ओर वे स्वर्ण-रजत और बहुमूल्य मणिरत्नों के प्रतिष्ठित व्यवसायी थे, दूसरी ओर वे अनेक प्रकार के सेवाकार्यों को पूर्ण औदार्य और सुव्यवस्थित तरीके से सम्पन्न करते थे। जलगाँव जिला सराफ एसोसिएशन के 25 वर्षों तक निरन्तर चेयरमेन रहे बाफनाजी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान का नारा है- ‘जहाँ विश्वास ही परम्परा है।’ विगत 4 दशकों से स्वर्ण-व्यवसाय में संलग्न बाफनाजी ने अपने व्यवसाय के माध्यम से न सिर्फ महाराष्ट्रवासियों का, अपितु पूरे भारतवर्ष का विश्वास सम्पादित करके जलगाँव को ‘स्वर्णनगरी’ के रूप में प्रतिष्ठित किया।
स्वर्णाभूषणों के लिए आज ‘आर.सी. बाफना पेढ़ी’ का उल्लेख ‘स्वर्णतीर्थ’ के रूप में किया जाता है। समाजसेवा, संघसेवा, मानवसेवा, गोसेवा, जीवदया, शाकाहार-प्रचार आदि अनेक क्षेत्रों में भी उन्होंने अपनी विश्वास की परम्परा को कायम रखा और जलगाँव को अथवा कहें देश को ‘अहिंसा तीर्थ’ के रूप में स्थायी उपहार दिया। 11 फरवरी 1935 को भोपालगढ़ (जोधपुर-राजस्थान) में जन्मे श्री बाफनाजी के सेवा कार्यों की एक झलक यहाँ प्रस्तुत है।
1. शाकाहार अभियान : शाकाहार प्रचार एक ऐसा कार्य है, जिसमें जीवदया, मानवसेवा और पर्यावरण-रक्षा; तीन उद्देश्यों की पूर्ति एक साथ होती है। बाफनाजी ने ऐसे पवित्र अभियान को अधिक गतिशील बनाने के लिए अनेक कदम उठाये और अविस्मरणीय कार्य किये। उन्होंने डेढ़ हजार स्कूलों-कॉलेजों तथा एक हजार गाँवों-कस्बों और संस्थाओं में शाकाहार-व्याख्यान दिये। अपने प्रभावशाली और तर्कपूर्ण व्याख्यानों के माध्यम से उन्होंने यह विचार जन-जन तक पहुँचाया कि प्राकृतिक, वैज्ञानिक, नैतिक और मानवीय दृष्टि से शाकाहार ही उत्तम आहार है। शाकाहार अभियान के अन्तर्गत ही उन्होंने स्वयं प्राथमिक स्कूलों में जाकर हजारों विद्यार्थियों को पुस्तकें, स्लेटें, वस्त्र आदि वितरित किये। कई स्थानों पर शाकाहार प्रदर्शनियाँ लगाईं। शाकाहार के व्यापक प्रचार के लिए उन्होंने अनेक उपायों के माध्यम से अनुपम कार्य किया और लाखों लोगों को शाकाहारी जीवन शैली की ओर मोड़ा।
2. अहिंसा तीर्थ : कुछ लोग गाय या गोशाला के नाम पर धंधा करते हैं तो कुछ राजनीति। इसके विपरीत बाफनाजी सच्चे गोसेवी हैं। उनके पारिवारिक न्यास से निर्मित, संचालित व आत्मनिर्भर विशाल गोशाला ‘रतनलाल सी. बाफना गोसेवा अनुसंधान केन्द्र’ का संक्षिप्त व लोकप्रिय नाम है- अहिंसा तीर्थ। अहिंसा तीर्थ बाफनाजी की कीर्ति-पताका भी है और हमेशा याद रखने योग्य स्थायी प्रेरक प्रकल्प भी। इसे देखने के बाद प्राकृत भाषा के ग्रंथ उपासकदशांग में वर्णित भगवान महावीर स्वामी के उन श्रावकों की याद आ जाती हैं, जिनके गोकुल (गोशालाओं) में हजारों गाएँ रहती थीं। वर्तमान में लगभग तीन हजार गायें इस केन्द्र में हैं। मवेशियों एवं पशु-पक्षियों की प्राण-रक्षा के लिए संकल्पित इस अनुसंधान केन्द्र के विभिन्न उपयोगी आयामों को जानने के लिए इन पंक्तियों के लेखक (डॉ. दिलीप धींग) द्वारा लिखित अहिंसा तीर्थ पुस्तक पढ़नी चाहिये और जलगाँव स्थित अहिंसा तीर्थ को प्रत्यक्ष देखना चाहिये।

5 अप्रेल 2012 को जलगाँव में आयोजित महावीर जयंती समारोह में मुख्यअतिथि डॉ. दिलीप धींग को सम्मानित करते रतनलाल सी. बाफना

3. यू-टर्न शाकाहार म्युजियम : अहिंसा तीर्थ के अन्तर्गत निर्मित यह ‘यू टर्न शाकाहार म्युजियम’ अपने तरीके का देश का एकमात्र म्युजियम (संग्रहालय) है। वैज्ञानिक शोधों, तुलनात्मक अध्ययनों, चित्रों, आँकड़ों और तथ्यों से इसमें यह सिद्ध किया गया है कि शाकाहार परिपूर्ण, वैज्ञानिक, आरोग्यदायक और सर्वश्रेष्ठ आहार है। साथ ही मांसाहार के विभिन्न दुष्परिणाम दर्शाये गये हैं। कत्लखानों में निर्दोष पशु-पक्षियों को बेरहमी से मारने के वीभत्स दृश्य देखकर दिल दहल उठता है। मरने वाले प्राणियों की करुण पुकारों और चित्कारों से पूरा वातावरण नकारात्मक प्रकम्पनों से भर उठता है। पूरे म्युजियम को समझकर देखने में दो घण्टे का समय लगता है। कोई व्यक्ति यदि सही ढंग से एक बार इस म्युजियम को देखे तो वह शाकाहारी जीवनशैली का प्रबल समर्थक बन सकता है।
4. आचार्य हस्ती अहिंसा अवार्ड : अहिंसा व शाकाहार-प्रचार को गति देने के लिए 1991 में उन्होंने आचार्य हस्ती अहिंसा अवार्ड प्रवर्तन किया, जो प्रतिवर्ष एक या एक से अधिक चयनित महानुभावों या संस्थाओं को प्रदान किया जाता है। पहले एक लाख की राशि वाला यह सम्मान वर्तमान में 5 लाख की सम्मान-राशि के साथ दिया जाता है।
5. क्षुधा शान्ति सेवा केन्द्र : मानवसेवा को समर्पित यह प्रकल्प बाफनाजी के इस विचार की परिणति है कि जलगाँव में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए। श्री केशव स्मृति प्रतिष्ठान के सहयोग से निर्धन लोगों के लिए मात्र दस रुपये में भोजन की व्यवस्था होती है, जिसमें करीब 3000 व्यक्ति नित्य लाभ उठाते हैं। इसके अलावा जून-2013 में उत्तराखण्ड में हुए जल-प्रलय के पीड़ितों को इस केन्द्र से कई दिनों तक लगभग 2000 भोजन पेकेट प्रतिदिन भेजे गये। इसी प्रकार आपदा में फँसे लोगों को समय-समय पर केन्द्र से मदद की जाती है।
6. आपदा में मदद : लातूर और उस्मानाबाद के भूकंप, कच्छ का संकट जैसी आपदा की घड़ियों में श्री बाफना जी ने स्वयं जाकर सहायता प्रदान की। सार्वजनिक लोकोपयोगी कार्यक्रमों के लिए श्री रतनलाल सी. बाफना फाउण्डेशन ट्रस्ट ने आज तक लाखों रुपयों की मदद की है।
7. नेत्र पेढ़ी : आपके अग्रज मांगीलालजी बाफना ने नेत्रदान किये थे। उनकी स्मृति में 3 मार्च 1999 को ‘मांगीलालजी बाफना नेत्र चिकित्सालय तथा नेत्र पेढ़ी’ का शुभारंभ किया गया। पेढ़ी द्वारा मोतियाबिन्दु नेत्र शिविरों का आयोजन, जरुरतमन्द बीमारों की चिकित्सा तथा शल्य-चिकित्सा की जाती है। अब तक डेढ़ सौ दृष्टिहीन व्यक्तियों को नेत्र प्रत्यारोपित किये गये हैं।
8. स्वाध्याय परीक्षाएँ व पुरस्कार : जैन इतिहास और संस्कृति के विशेष अध्ययन व प्रचार-प्रसार के लिए रतनलाल सी बाफना फाउण्डेशन द्वारा आचार्य हस्ती प्रणीत ‘जैन धर्म का मौलिक इतिहास’ पर देश में 75 केन्द्रों पर परीक्षाओं का आयोजन किया गया तथा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इसी प्रकार मूल आगम ग्रंथ ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ पर भी परीक्षाएँ लेकर विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गये। आपके सौजन्य से अनेक संस्कार-शिविरों, स्वाध्याय-शिविरों का आयोजन भी किया गया।
9. स्वाध्याय भवन : उन्होंने लगभग एक दर्जन स्थानों पर सामायिक, स्वाध्याय और आराधना के लिए सुविधायुक्त भवन बनाकर समाज को समर्पित कर दिये।
10. अन्य सेवाएँ : अनेक जरूरतमन्द माताओं-बहिनों को प्रतिमाह मनीऑर्डर द्वारा वित्तिय सहायता प्रेषित की जाती है। उन्होंने दिव्यांग भाई-बहिनों के लिए संस्थान भी बनाया। जलगाँव में तीन जलमन्दिर सुचारु रूप से संचालित हैं। अपने साथियों के सहयोग से विकलांग बंधुओं को अब तक करीब 2600 तिपहिया साइकिलें वितरित की हैं। यह भी पढ़े-शब्द प्रवाह डॉट पेज  भागवत के विजय उद्बोधन की प्रेरणाएं
अ. भा. श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे श्री आर. सी. बाफनाजी के सेवाकार्यों की सूची बहुत लम्बी है। उनके सेवाकार्यों का मूल्यांकन भी समय-समय पर हुआ है। उन्हें प्राप्त सम्मानों का विवरण यहाँ दिया जा रहा है।
1. भगवान महावीर अवार्ड : शाकाहार-प्रचार, प्राणिरक्षा व मानवसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भगवान महावीर फाउण्डेशन, चेन्नई की ओर से वर्ष 1997 में पाँच लाख रुपये की सम्मान-राशि, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न के साथ यह अवार्ड प्रदान किया गया। फाउण्डेशन के संस्थापक न्यासी एन. सुगालचन्द जैन, भारतरत्न सी. सुब्रह्मण्यम् एवं अतिथियों के हाथों उन्हें इस बहुत ही प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। राशि की दृष्टि से यह अपने क्षेत्र का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
2. जमनालाल बजाज उचित व्यवहार पुरस्कार : व्यवसाय में प्रामाणिकता और विकास के लिए 1996 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहनसिंह के कर-कमलों से यह पुरस्कार मिला।
3. जैन-रत्न : 8 अप्रेल 2001 को भारत जैन महामंडल तथा 4 जैन संस्थाओं की ओर से शाकाहार, अहिंसा, जीवदया व समाजसेवा के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के कर-कमलों द्वारा यह अलंकरण मिला।
4. रत्नसंघ विभूषण : अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, जोधपुर की ओर से फरवरी-2017 में बाफनाजी को यह उपाधि प्रदान की गई। आचार्य हस्ती की जन्मभूमि पीपाड़शहर में आयोजित समारोह में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी.एस. सुराणा, संघ-संरक्षक मोफतराज पी. मुणोत, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया एवं अतिथियों ने उन्हें शॉल, मुक्ताहार, अभिनन्दन-पत्र और रजत अलंकरण पट्टिका भेंट करके सम्मानित किया।
5. अन्य सम्मान : 1994-95 में भारतीय गोवंश संवर्द्धन प्रतिष्ठान, नई दिल्ली की ओर से शाकाहार, व्यसनमुक्ति, गोसेवा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्यों के लिए ऋषभश्री पुरस्कार, 19 नवम्बर 1999 को दि वेजिटेरियन सोसायटी, मुम्बई द्वारा वेजिटेरियन ऑफ दि इयर सम्मान, श्री जैन युवक संघटना, पूना द्वारा शाकाहार प्रिय पुरस्कार, 2010 में श्री जैन सेवा संघ, मुम्बई द्वारा सेवारत्न अलंकरण, श्री गुजराती समाज मण्डल द्वारा वर्ष 2013 में ‘महाराष्ट्र गौरव’ अलंकरण आदि अनेक सम्मान/पुरस्कार।
इनके अलावा भी समय-समय पर अनेक संघों, प्रतिष्ठानों व संगठनों की ओर से आपका अभिनन्दन और सम्मान होता रहा है। आपका सम्मान करके कोई भी संस्था अपने आपको गौरवान्वित महसूस करती है। डायरी-लेखक बाफनाजी की डायरियों में उपलब्ध सामग्री के आधार उनकी तीन पुस्तकें भी प्रकाशित हुईं, जिनका सम्पादन इन पंक्तियों के लेखक (डॉ. दिलीप धींग) ने किया। बाफनाजी की प्रेरणादायी जीवन-साधना, सेवाओं और उपलब्धियों के बारे में भी इन पंक्तियों के लेखक (डॉ. दिलीप धींग) ने एक पुस्तक लिखी। 140 पृष्ठीय सचित्र व बहुरंगी इस किताब का प्रकाशन 2019 में ‘प्रगति का पथिक’ नाम से हुआ।
*डॉ.दिलीप धींग
(निदेशक : अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र)

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