Wednesday 21st April 2021

साहित्य, संस्कृति, शोध  से जुड़ी मूल्य परक पत्रिका समय सुरभि अनन्त

साहित्य, संस्कृति, शोध  से जुड़ी मूल्य परक पत्रिका समय सुरभि अनन्त

पत्रिका : समय सुरभि अनन्त त्रैमासिक, संपादक : श्री नरेन्द्र कुमार सिंह संपर्क : शिवपुरी (जेल क्वार्टर से पश्चिम), बेगूसराय - 851101 (बिहार) वार्षिक शुल्क: 150 रुपये समिक्षकः राजकुमार जैन राजन



पिछले तेरह वर्षों से  बिहार के बेगूसराय से निरन्तर प्रकाशित हो रही  त्रैमासिक पत्रिका “समय सुरभि अनन्त” हिन्दी साहित्य की उत्कृष्ट पत्रिकाओं में शुमार हो चुकी है जो साहित्य, संस्कृति, शोध  से जुड़ी मूल्य परक पठनीय सामग्री प्रकाशित करती है। इसके संपादक श्री नरेन्द्र कुमार सिंह जी जो स्वयं भी एक ख्यातनाम रचनाकार है, पूरी शिद्दत से इसके लिए अपना समय देते हैं। इस पत्रिका ने कई चर्चित विशेषांक भी प्रकाशित किये हैं जिनमे से एक “बाल साहित्य विशेषांक” का सम्पादन करने का सौभाग्य मुझे भी  मिल चुका है। वर्षों से मैं इस पत्रिका का नियमित पाठक हूँ।



हाल ही में इसका जनवरी – मार्च 2020 का अंक प्राप्त हुआ है। अपने प्रेरक संपादकीय में दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति , “सूरत संवारने में बिगड़ती चली गई, पहले से हो गया है जहां और भी खराब”  उदृत करते हुए बढ़ते हुए सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक विघटन पर सार्थक बात  करते हुए  सम्पादक जी ने लिखा है कि,”आपसी भाईचारा, और सहिष्णुता के पौधे को पल्लवित , पुष्पित करें। घृणा और हिंसा को अपने और अपनों से दूर करें”।



इस  अंक में कई महत्वपूर्ण आलेख है जो साहित्य, संस्कृति, परम्परा, परिवेश पर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। डॉ विनोद बब्बर, डॉ अमरसिंह वधान, श्री प्रभात कुमार राय, डॉ पशुपतिनाथ, श्री राजकुमार जैन राजन, श्री परवेज  यूसुफ, श्री सलिल सरोज, रजनी प्रधान आदि के महत्वपूर्ण आलेख साहित्यिक सरोकारों  व समाज मे आ रहे बदलावों को हिन्दी के सुधी पाठकों के सामने लाने के लिए जरूरी मसलों पर विचारोत्तेजक विमर्श है जिनका चयन पूरी सजगता से किया गया है।



श्री रामबाबू नीरव की “एहसान फरामोश” , श्री हरिशंकर परसाई की ” अश्लील” एवम मीरा सिंह मीरा की “लिहाज” कहानियां सार्थक है जो पाठक के मन को गहरे तक उद्वेलित करती है। इस अंक में 26 रचनाकारों की विभिन्न काव्य रचनाएँ भी जिनमें से एक- दो को छोड़कर बाकी बेहतरीन चयन कहा जा सकता है । लघुकथाएं, व्यंग्य, पुस्तक समीक्षाएं, साहित्यिक समाचार, को भी हर अंक की तरह  पर्याप्त स्थान दिया गया ।यह सब सम्पादकीय कौशल को दर्शाता है।



सोशल मीडिया के इस युग में साहित्यिक पत्रिकाओं की स्थिति दिन- ब -दिन दयनीय होती जा रही है ऐसे में व्यक्तिगत स्तर से इतनी उत्कृष्ट पत्रिका का निरन्तर प्रकाशन शुभ संकेत है। “समय सुरभि अनन्त” त्रैमासिक पत्रिका की छपाई, सफाई, कागज , मुखपृष्ठ सुंदर और मनमोहक होती है। साहित्यिक अभिरुचि के पाठकों, लेखकों को इस स्तरीय पत्रिका से जुड़ना चाहिए। रचनात्मक सहयोग की तो भीड़ रहती है पर हिंदी के प्रचार- प्रसार में अपनी सहभागिता निभाते हुए हमें इन पत्रिकाओं को सद्स्यता शुल्क रूपी “प्राणवायु” प्रदान करना चाहिए। पत्रिका की सम्पादकीय टीम को हार्दिक बधाई एवम मंगल कामनाएं।
समीक्षक- राजकुमार जैन राजन
चित्रा प्रकाशन , आकोला -312205 ( राजस्थान)  मो: 9828219919



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