Wednesday 21st April 2021

संप्रदायिकता और देश का अस्तित्व

संप्रदायिकता और देश का अस्तित्व

लेख*नीरज मिश्रा

हिंदुस्तान का दिल दिल्ली में यह हिंदू मुस्लिम की मारकाट या सीधे शब्दों में दंगा कहें देख कर मन में क्रांतिकारी फिल्म का वह दृश्य याद आता है जिसमें नाना पाटेकर हिंदू मुस्लिम के खून को अपने हथेली पर मिला कर उनसे अपना खून पहचानने को कहते हैं तो सभी के सर शर्म से झुक जाते हैं ।यह तो एक फिल्म थी पर आज देश के हालात कुछ ऐसे ही हैं। हमारे समाज को ऐसे लोगों की जरूरत है।



हकीकत में देखा जाए तो आज भी सभी संप्रदाय में परस्पर प्रेम भाव है पर वह प्रेम भाव दिखाया नहीं जाता है ।या यूं कह लो बड़े-बड़े लोगों को अपने दूषित मन के कारण हजम ही नहीं होता। इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हाथ भी कम नहीं है ।मीडिया की आंख भी वही होती है जहां लड़ाई झगड़ा होता है ।कभी उस ओर नहीं होता ,जहां भाईचारा होता है ,जहां मुस्लिम हिंदू एक दूसरे को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बानी देते हैं। मीडिया की आंख उस जगह कभी नहीं पड़ती जहां एक हिंदू दोस्त अपने मुस्लिम दोस्त के परिवार की हिफाजत करता है ।कुछ कद्दावर नेता राजनीति में अपना चेहरा चमकाने के लिए दंगे रूपी फेशियल का इस्तेमाल करते हैं। बेचारे सीधे साधे लोगों को तो यह भी नहीं पता कि लड़ाई झगड़ा होता क्या है? सभी अपनी अपनी रोजी रोटी की जुगाड़ में दिन रात मेहनत करते हैं ।उनका तो यही फलसफा हमेशा रहता है।” नज़दीकियां इतनी हो दिलों में कि कभी तुम मस्जिद तक हमें छोड़ दो और कभी हम मंदिर तक तुम्हें छोड़ दें”



आज भी हिंदू मुसलमानों का खून एक दूसरे के शरीर में दौड़ता है, पर मुट्ठी भर लोग इस प्रेम को नफरत के पालने में पाल पोस कर उसे दंगा रूपी मजबूत पेड़ बना देते हैं, जिसकी जड़ें समुद्र से भी ज्यादा गहरी हैं। जब भी 6 दिसंबर आता है। मन में आतंक का वीभत्स चेहरा कब्जा कर लेता है ।आक्रामकता का वीभत्स चेहरा हर किसी के जेहन में उभरता है ,पर अगर देश विरोधी चेहरे अपना खूनी खेल ना खेले तो चारो ओर शांति की बाहर बनी रहती है ।कश्मीर में धारा 370 हट गई 35a हटी पर कोई दंगा खून खराबा नहीं हुआ । वजह साफ है ,जो सेकुलरिज्म का जिन्न था,उसे पहले ही बोतल में बंद कर दिया गया ।मजबूत रणनीति का नमूना पेश किया गया ।आज कश्मीर में थोड़ी परेशानी जरूर है पर वहां भय का माहौल नहीं । वहां की बहन बेटियां खुली हवा में सांस ले रही हैं। गरीब और औसत दर्जे के लोग आगे बढ़ने व अपने परिवार को खुशियां देने के बारे में सोचते हैं। पर देश विरोधी तत्व उनके अंदर देश विरोधी विचारों का समावेश करते हैं, किसी भी सूचना को तोड़ मरोड़ कर पेश करके जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं।



दिल्ली का शाहिनबाग आज के समय का सबसे बड़ा मुद्दा है ।जहां मुस्लिम औरतें सी ए ए, एन आर सी और एनपीआर के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रही हैं, 2 महीने से महिला दिवस मनाया जा रहा है ।सब काम का छोड़ कर धरना प्रदर्शन में महिलाएं शामिल हो रही हैं । कुछ महिलाओं को तो यह तक नहीं पता कि उन्हें यहां लाया ही क्यों जा रहा है ,कुछ महिलाएं तो 500 और भरपेट साही भोजन के लालच में वहां पर प्रदर्शन कर रही और कुछ विरोधी तत्वों के बहकावे में आकर प्रदर्शन कर रही हैं ।हकीकत क्या है ?किसी को नहीं पता और जिन महिलाओं को इस शाहिनबाग की हकीकत पता है ।वह किसी ना किसी तरह अपना राष्ट्र धर्म निभा रही हैं ।और इस सच्चाई को बयां कर रही हैं । और कुछ तो अपनी राजनीति चमका रहे हैं इन समीकरणों से मिलकर ही शाहीन बाग बना है।



हमारे देश हमारे हिंदुस्तान का दुर्भाग्य तो देखिए जो भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है ,उसी उसी विश्व गुरु का समर्थन पूरा विश्व कर रहा है ।पर उसी भारत के अंदर विपक्षी दल अपने शत्रु राष्ट्र पाकिस्तान के पक्ष में खड़े हैं ।यह हमारे भारत का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है?
हमारे ही देश में देश के विश्वविद्यालय जहां छात्र अपना भविष्य संवारते हैं आज गंदी राजनीति का पोषक बन गए हैं। जहां पर 50 वर्ष से ६०वर्ष तक के छात्र-छात्राएं मुफ्त की सुविधाओं के साथ राष्ट्र को विश्व के सामने झुकाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। दिल्ली के जामिया और जेएनयू विश्वविद्यालय में आज आतंकवादियों की खेप तैयार हो रही है। सरकार को चाहिए कि इन दोनों विश्वविद्यालयों को बंद करके उसकी जगह पर एक अस्पताल खोल देना चाहिए जिसमें गरीब लोगों का या तो मुक्त किया कम से कम धनराशि में उनका अच्छे से इलाज हो सके। उत्तर प्रदेश सरकार ने हज हाउस को बंद करके वहां पर 500 बेड का अस्पताल खोलकर एक सराहनीय कदम उठाया है।



संप्रदायिकता का रंग हर क्षेत्र में चाहे वह शिक्षा ,न्याय हो चिकित्सा हो या मीडिया हो राष्ट्र विरोधी तत्वों का बोलबाला हर जगह हैं हर क्षेत्र में फूंक फूंक कर कदम रखना पड़ेगा तभी विकास की तस्वीर उभरकर सामने आ पाएगी। सांप्रदायिकता व आरक्षण जैसे मुद्दों ने देश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है ।जहां पर 98% लाने वाले छात्र अयोग्य घोषित हो रहे हैं और 45% लाने वाले छात्र सफलता के नित नए सोपान चढ़ रहे हैं। सामान्य श्रेणी को प्रत्येक क्षेत्र में मायूसी ही मिल रही है।



आज के दौर में संप्रदायिकता अपने चरम सीमा पर है ,वरना एक वह दौर भी था जब हिंदू एक हिंदू प्रधान मंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई और मुस्लिम राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम हमारे राष्ट्र की एकता का प्रतीक हुआ करते थे ।इनको देखकर एक स्वस्थ और सुंदर राष्ट्र की तस्वीर उभरती है। भारत की संस्कृति को आज पूरा विश्व अपना रहा अपना रहा है। पर हमारे ही देश की संस्कृति हमारे ही देश के लोगों के कारण संप्रदायिकता की भेंट चढ़ रही है। अतिथि देवो भव भाव को मानने वाले राष्ट्र में अतिथि के आने पर राष्ट्र विरोधी तत्व अपने ही राष्ट्र की छवि बिगाड़ने पर तुले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा और दिल्ली का दंगा पुराना नहीं है।



राष्ट्र विरोधी ताकतों ने राष्ट्र की छवि बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी ।इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को यह नहीं भूलना चाहिए जहां राष्ट्र विरोधी ताकतें राष्ट्र को झुकाने के लिए अपना ईमान धर्म और जान दांव पर लगाए बैठे हैं, वहीं भारत मां का सिर गर्व से ऊंचा बनाए रखने के लिए मां के शेर उसके आगे अपना सर हथेली पर लिए उसकी रक्षा के लिए खड़े हैं। हमारा हिंदुस्तान विश्व का एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जहां पर हर आने वाले शरणार्थी को बेपनाह प्यार और इज्जत मिलती है ,पर वही शरणार्थी अपने गंदे मंसूबों की नई फसल तैयार करके हमारे राष्ट्र की छवि धूमिल कर रहे हैं ।पर सच कहा जाए तो गलती उनकी भी नहीं है “जब घर को दाम खोटो तो परखैया दोषी काय “वाली कहावत बिल्कुल सच है।



हमारे अपने ही हिंदू मुस्लिम भाई आपस में लड़ कर अपने ही देश की छवि खराब कर रहे हैं, वे जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं ।अपने कुकृत्य से अपने राष्ट्र की छवि और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा नुकसान पहुंचायी गई संपत्ति की भरपाई उनकी अपनी संपत्ति को जप्त करने जैसा कदम उठाकर सराहनीय कार्य किया है। इस कदम से विरोधियों की कमर तो टूटेगी ही साथ ही साथ अराजकता पर भी लगाम लगेगी।

*नीरज मिश्रा


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