Wednesday 21st April 2021

सोशल मिडिया कितना सही

सोशल मिडिया कितना सही

लेख*राखी सरोज

भारत देश एक बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। भारत में युवाओं की संख्या बहुत अधिक है। जिसके चलते भारत में सोशल वेबसाइट का प्रयोग भी बहुत अधिक है। जिसमें से भारत में फ़ेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सएप का प्रयोग आम सी बात है। आज कल यह सोशल माध्यम हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, दिन-प्रतिदिन की दिनचर्या में हम इसका प्रयोग हर रोज करतें हैं। आज कल इनका प्रयोग करने में इतने अधिक व्यस्त होने लगें हैं कि अपनी असल जिंदगी को भूलते जा रहे हैं।

ऐसे में यदि हमें ज्ञात हो कि जिसे हम अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं और जिस पर हम पूरा भरोसा कर रहें हैं वह सोशल वेबसाइट या एप निष्पक्ष नहीं है। आपको इन वेबसाइटों का प्रयोग कर किसी एक प्रकार की जानकारी को जानने और समझने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आपके प्रति यह वेबसाइट अपना फर्ज निभाने की जगह अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहीं हैं।
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फेसबुक-ट्वीटर जैसी वेबसाइट का प्रयोग हम सभी आज कल कर रहे हैं। किंतु यह वेबसाइट कितनी सुरक्षित है या इनसे प्राप्त होने वाली जानकारी कितनी सही है या ग़लत। इसका पता लगा पाना बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि अधिकतर ही इन वेबसाइट पर दी जाने वाली जानकारी समाचार पत्रों या न्यूज़ चैनलों से बिल्कुल ही अलग होती है। अधिकतर हमने देखा है कि फेसबुक पर अश्लील तस्वीरों और लड़कियों के लिए अश्लील भाषा का प्रयोग आम सी बात है। किंतु इसके बावजूद भी यह कार्य करने वालों पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जाती है। फेसबुक झूठी अफवाह फैलाने वाले व्यक्तियों के अकाउंट पर कोई भी कार्यवाही अपनी ओर से नहीं करता है। फेसबुक पर अक्सर ही धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं। फेसबुक द्वारा गलत कार्य करने वाले व्यक्तियों को रोकने के लिए कोई नियम कानून नहीं बनाता है जिससे ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
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फेसबुक और व्हाट्सएप दोनों ही भारत में प्रयोग होने वाले बहुत ही महत्वपूर्ण ऐप और वेबसाइट हैं। इन दोनों का ही अधिकारी मार्क जुकरबर्ग है। व्हाट्सएप और फेसबुक प्रत्येक रोज करोड़ों की कमाई केवल भारत के द्वारा ही नहीं देशों द्वारा मार्क जुकरबर्ग द्वारा की जा रही है किंतु वह फेसबुक और व्हाट्सएप का प्रयोग किए जाने वाले लोगों के लिए सुरक्षा का कोई भी ऐसा इंतजार नहीं करते जिसके द्वारा धोखाधड़ी और झूठी अफवाह फैलाने वालों को रोका जा सके। मार्क जुकरबर्ग के लिए व्हाट्सएप और फेसबुक पर योग करने वाले लोग केवल यूजर से वह उन्हें किसी देश के वासी या नागरिक शायद नहीं समझते हैं।

फेसबुक और व्हाट्सएप पर आने वाली खबर के द्वारा ही अधिकतर लोगों की मानसिक सोच को बदला जाता है और जिसका प्रयोग कर चुनावी समय में प्रत्येक राजनीति पार्टी अपने जितने के लिए गलत झूठी खबरों का प्रचार करतीं हैं। लोगों की निजी जानकारी को चुराकर उनकी मानसिक स्थिति को समझ कर उसके अनुसार ही उनके सामने ऐसे विचार प्रकट किए जाते हैं जिससे वह झूठ को भी सच समझने लगते हैं। किंतु ऐसी खबरों और झूठे वीडियो पर मार्ग जुकरबर्ग द्वारा रोक लगाए जाने के लिए कोई कार्य नहीं किए जा रहे। भारत या किसी अन्य देश द्वारा ही इन वेबसाइट पर होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। किंतु इन‌ वेबसाइट और एप के मालिकों द्वारा करोड़ों की कमाई तो की जा रही है किंतु अपनी जिम्मेदारियों से मुख भी मोड़ा जा रहा है।
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रोज आम व्यक्तियो द्वारा प्रयोग की व्यक्तियो द्वारा प्रयोग की जाने वेबसाइट और ऐप के मालिकों द्वारा यह फैसला लेना जरूरी है। भारत हो या कोई अन्य देश सभी के नागरिकों के अधिकार है कि वह एक निष्पक्ष और सही चुनाव करें। ऐसे चुनावों को यदि किसी बेवसाइट या एप द्वारा प्रभावित किया जाता हैं गलत प्रकार से, तब यह जिम्मेदारी बनती है और व्हाट्सएप के मालिकों की कि वह केवल अपना फायदा ना देखें उन्हें जिम्मेदार बन अपने यूजर्स को सही जानकारी देनी चाहिए। जिसके लिए ट्विटर द्वारा कई कदम उठाए भी जा रहे हैं।

फेसबुक को भी ट्विटर से सीखने की आवश्यकता है कि वह किस प्रकार से अपने यूजर्स को केवल एक नंबर ना समझे और उन्हें केवल अधिक से अधिक कमाई का जरिया ना समझें। झूठी खबरें फैलाने वाले या हिंसा फैलाने वाली खबरों पर रोक लगाने के साथ ही साथ इन वेबसाइट के मालिकों को चाहिए कि वह ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक करें ताकि अन्य वेबसाइट और एप भी इस प्रकार के व्यक्तियों पर नजर रख सकें। हमारा अधिकार है कि हम अपने द्वारा प्रयोग किए जाने वाले एप और बेवसाइट को अधिक से अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की मांग करें।


*राखी सरोज

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