Wednesday 21st April 2021

स्वस्थ रहना है? तो मनोविज्ञान को जानना है जरूरी

स्वस्थ रहना है? तो मनोविज्ञान को जानना है जरूरी

लेख*सोनी जैन

कोरोना का हमारी मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है हर समय एक तनाव बना रहता है जिसको “कोरोना तनाव” कहा जाता है। हम में से हर एक व्यक्ति को अपनों से मिलना, दोस्तों से बात करना उनके साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता है,क्योंकि हम सभी को यह अंदरूनी खुशी देता है और एक सामाजिक सुरक्षा की भावना भी महसूस होती है। हम सभी सामाजिक प्राणी हैं और एक दूसरे से मिलने के बाद हम अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। परंतु सामाजिक दूरी के चलते अब यह खुशियां हमसे दूर हो रही है और इस कारण एक उदासी,बेचैनी हमेशा बनी रहती है।
डर लगा रहता है की जरा सी असावधानी से हमें या परिवार के किसी सदस्य को कोरोना ना हो जाए अगर ऐसा हुआ तो पूरे परिवार का जीवन दांव पर लग जाएगा और हंसता खेलता परिवार अंधेरे की गर्त में चला जाएगा। साथ ही साथ लोगों का जमा जमाया कारोबार और नौकरी जाने से आर्थिक संकटों ने उन्हें घेर लिया है। जिसके चलते लोगों को पैनिक अटैक आ रहे हैं। जिनके लक्षण बिल्कुल हार्ट अटैक जैसे होते हैं।



जो परिवार कोरोना का दंश झेल चुके हैं उनमें PTSD (post traumatic stress disorder) की समस्या देखने को मिल रही है। वास्तव में यह समस्या तब शुरू होती है जबकि हम किसी ऐसी घटना का सामना करते हैं जिसकी हमने उम्मीद कभी नहीं की होती जैसे कि किसी प्रियजन की मृत्यु हो जाना,कोई बड़ी दुर्घटना हो जाना या आजकल के समय में परिवार में किसी का कोरोना संक्रमित हो जाना। PTSD की समस्या में लोगों को बहुत अधिक मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
विद्यार्थी और उनके परिवारजन भी भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा तनाव में है क्योंकि बहुत सी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं अभी तक नहीं हुई है इसी कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कोरोना की वजह से मनोवैज्ञानिक समस्याएं लगातार बढ़ रही है अतः हमें आवश्यकता है इन समस्याओं का सही उपचार किया जाए और भविष्य के लिए अपने आप को मानसिक रूप से तैयार किया जाए।
जब भी हमें कोई शारीरिक समस्या होती है जैसे बुखार, खांसी, शरीर में कहीं दर्द या अन्य कोई समस्या तो उसके इलाज के लिए हम तुरंत ही डॉक्टर के पास आते हैं परंतु जब मानसिक समस्याओं जैसे तनाव ,चिंता, उदासीनता, घबराहट, बेचैनी, उन्माद, नींद ना आना आदि आती हैं तब हमें कभी भी यह महसूस नहीं होता कि हम किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की सलाह ले, उनसे उपचार कराएं। क्यों हम अपनी मानसिक समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते? जबकि मानसिक समस्याओं से बहुत से गंभीर शारीरिक रोग हो जाते हैं जिनका कारण भी हमें पता नहीं चलता।



मेरे विचार में इसका मुख्य कारण यह है कि हमने मनोविज्ञान को पागलपन के साथ जोड़ दिया है। जी हां जैसे हमें यदि कोई व्यक्ति अजीब सा व्यवहार करते हुए दिखाई देता है तो हम उसे मेंटल(Mental) या साइको (psycho) के नाम से पुकारते हैं। उनके अनुसार इसका अर्थ होता है पागल। ऐसे में एक सामाजिक धारणा बन गई है कि यदि हम किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास अपना उपचार कराने के लिए जाएंगे तो लोग हमारे ऊपर पागलपन का ठप्पा लगा। इसलिए कई बार मानसिक परेशानियां बहुत ज्यादा होने पर भी व्यक्ति को मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास जाने का विचार मन में नहीं आता।
मानसिक समस्याओं के प्रति उदासीनता का दूसरा मुख्य कारण है कि हम लोगों को इनका बहुत सीमित ज्ञान है और यह सीमित ज्ञान या जानकारी केवल कम पढ़े-लिखे लोगों में ही नहीं बल्कि बहुत अधिक पढ़े लिखे लोगों का भी यही हाल है। लोगो को अपनी मानसिक समस्याओं का पता ही नहीं चलता। वह भूत-प्रेत जादू-टोना सब करवाते रहते है लेकिन मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास नहीं जाते।क्योंकि वह जानते ही नहीं हैं कि उन्हें कोई मनोवैज्ञानिक समस्या हो रही है। जब तक उन्हें समस्या पता चलते हैं तब तक बीमारी लाइलाज हो चुकी होती है।



हम सभी के लिए मनोविज्ञान को जानना बहुत जरूरी है तभी हम मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं और एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकते हैं। मनोविज्ञान हमारे व्यवहार, अनुभव और मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है और उन्हीं के आधार पर हमारी मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करता है इसके साथ ही साथ मनोविज्ञान हमारी उत्सुकताओं को भी शांत होता है। जैसे हमारे मन में बहुत सारे प्रश्न आते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पैर नहीं है तो वह माउंट एवरेस्ट की चोटी को कैसे फतह कर सकता है? यदि किसी का शरीर लकवा मार गया है तो वह मैराथन दौड़ कैसे जीत सकता है? हम सम्मोहित कैसे हो सकते हैं ? सपने आने का क्या कारण है? नींद क्यों नहीं आती? आदि ऐसे सारे प्रश्नों के जवाब केवल मनोविज्ञान के पास ही है। स्थिति सामान्य हो या फिर कोरोना जैसी हो हर स्थिति में हमने मनोविज्ञान का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।

*सोनी जैन,मेरठ
(मनोविज्ञान विशेषज्ञ)



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
CATEGORIES
TAGS

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )