Wednesday 21st April 2021

वैश्विक महामारी कोरोना–एक अनुशीलन की संक्षेपिका

वैश्विक महामारी कोरोना–एक अनुशीलन की संक्षेपिका

व्यंग्य*डॉ हरीशकुमार सिंह

प्रस्तावित विषय इस समय न्यूज़ चैनलों की हेडलाइन्स है तो प्रिंट मीडिया में चारों और कोरोना ही छाया हुआ है।पूरे विश्व का ध्यान कोरोना वायरस और बीमारी ने अपनी और खींच रखा है और विश्व का प्रत्येक नागरिक इसे पराजित करने में जुटा हुआ है।यह वर्तमान शताब्दी का सर्वाधिक चर्चित विषय है और सारे साहित्यकार चाहे वे किसी भी विधा के हों कोरोना पर ही कलम चला कर अपनी तालाबंदी को सार्थक कर रहे हैं तो रोजगार वालों को भी कोरोना ने बेरोजगार कर घर बैठा दिया है।इस विषय पर देश के किसी भी विश्वविद्यालय में अभी तक कोई शोध नहीं हुआ है और यह अभी तक की पहली डाक्टरेट है जिसकी संक्षेपिका (जीव बिज्ञान / सामाजिक विज्ञान/ चिकित्सा विज्ञान विषय , जो अनुमति दे दे के) अनुमोदन हेतु प्रस्तुत है।



प्रस्तावित विषय का अध्ययन आठ अध्यायों में किया गया है।

 पहले अध्याय में मरदूत कोरोना वायरस की उत्पत्ति, जन्म देश चीन की महामारी -षडयंत्र या आपदा , कोरोना के विषैले परिवार और संहारक पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन किया गया है।

दूसरे अध्याय में कोरोना विश्वव्यापी कैसे हुआ इसके कारणों पर प्रकाश डाला गया है।

तीसरे अध्याय में कोरोना भारत देश में किस मार्ग से और कैसे अवतरित हुआ यह जानने का प्रयास किया गया है और कोरोना कहर के बीच प्रशासन की सख्ती के कारण उपयोगी वस्तुओं की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी करने वालों की पहचान की गई है ।

चौथे अध्याय में कोरोना को रोकने के लिए कोरोना चैन क्या होती है, संक्रमण तोड़ने में लॉक डाउन की महती भूमिका, कोरोना को खत्म करने के सोशल मीडिया के देसी नुस्ख़ों की सत्यता के साथ, कोरोना को भगाने में गाये जाने वाले कारगर गीत, आल्हा और आरती का अध्ययन किया गया है।

पांचवे अध्याय में लॉक डाउन का अर्थ , इसके साइड इफ़ेक्ट , लॉक डाउन तोड़ने वालों को लेकर पुलिस की उर्जित मनोदशा को जांचने का प्रयास किया गया है क्योंकि यही ऐसी अवस्था होती है जिसमें पुलिस बेख़ौफ़ होकर अपने डंडा अस्त्र का इस्तेमाल करती है और उस पर किसी का कोई डर, दवाब या नियंत्रण नहीं रहता। इस स्थिति में पुलिस अपने ऊपर दवाब डालने वाले का भी सार्वजनिक अभिनन्दन कर देती है।



छठवें अध्याय में लॉक डाउन की स्थिति में तलाक शुदा याने अलग अलग रह रही जोड़ियों पर प्रभाव और पति – पत्नी के रूप में निरंतर साथ रह रही जोड़ियों की मनस्थिति और एक दूसरे की अवस्था मे रूपांतरित होने की संभावनाओं पर अनुसंधान किया गया है।

सातवें अध्याय में लॉक डाउन का बेवजह उल्लंघन कर कोरोना चैन को बाधित करने में खतरा बनने वाले जाहिल बाइकर्स, लोगों को इकठ्ठा करने वाले जाजिम, जलसा और जमाती का अध्ययन किया गया है।

आठवें अध्याय में कोरोना संकट से मंदी की और तेजी , बेरोजगारी और छंटनी ,अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और कोरोना की रोकथाम में लगे सरकारी, अर्धसरकारी कर्मवीरों की शौर्य गाथाएं और निजी अस्पतालों के दुबके अर्थवीरों की कलंकित कथाएं जुटाई गईं हैं।



उपसंहार के अंतर्गत आजादी के बाद से ही चिकित्सा विज्ञान के मामूली बजट और सीमित सुविधाओं के साथ भी कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण , रोकथाम के लिए किए गए सफल सरकारी उपायों की समीक्षा के अलावा वैकल्पिक उपायों यथा घंटा थाली बजाने, मौन रहने, अँधेरा घुप करने , दिया मोमबत्ती जलाने , धूप में बैठकर वायरस से बचने जैसी क्रियाओं से जनता का मनोबल बनाये रखने , गर्म पानी पीकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विश्व को मार्गदर्शन देने में भारत की भूमिका के निष्कर्ष बताये गए हैं। (टीप – संक्षेपिका किसी विषय पर डाक्टरेट हेतु , विषय स्वीकृति हेतु विश्विद्यालय को प्रस्तुत की जाती है)

*डॉ हरीशकुमार सिंह, उज्जैन


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