Wednesday 21st April 2021

विज्ञान व्रत की ग़ज़लें

ग़ज़लें




वो फ़साना छोड़िए ना
क्या बताना छोड़िए ना

अब न आना छोड़िए ना
हर बहाना छोड़िए ना

दर्द आँखों से बयाँ है
अब छुपाना छोड़िए ना

ये ज़माना आपका है
वो ज़माना छोड़िए ना

अब हमें गाहे – बगाहे
आज़माना छोड़िए ना

************************************

ये बहाना वो बहाना
आपका अक्सर न आना

आप जिसमें कुछ नहीं हैं
वो फ़साना क्या सुनाना

बस मुझे महसूस करके
क्या लगा मुझको बताना

याद क्यों अक्सर रहा जो
चाहता हूँ भूल जाना

खा चुका हूँ आपसे जो
आप वो धोखा न खाना

*विज्ञान व्रत, नोएडा



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