Tuesday 18th May 2021

प्रथम पुण्य स्मरण 12 अप्रैल 2020

ज़िंदादिल हास्य सम्राट कवि प्रदीप चौबे

ज़िंदादिल हास्य सम्राट कवि प्रदीप चौबे

स्मरण लेख*डा हरीशकुमार सिंह

कविता की मंचीय दुनिया के हास्य के सम्राट कवि माने जाने वाले ग्वालियर के प्रदीप चौबे सत्तर वर्ष की आयु में ही ,पिछले वर्ष 12 अप्रैल को अपने प्रेमियों को अलविदा कह गए | गणेश चतुर्थी को 26 अगस्त 1949 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर में जन्मे प्रदीप चौबे अनायास ही कविता की दुनिया में आ गए जब देना बैंक में प्रारम्भिक नौकरी में होने पर उनकी वाकपटुता और हास्य मिश्रित बातचीत से प्रभावित होकर उनके शुभचिंतकों ने उन्हें मंच पर भाग्य आजमाने को कहा | और प्रदीप चौबे ने सलाह मानकर कविता के क्षेत्र में प्रवेश किया और धीरे धीरे प्रदीप जी हर सफल कवि सम्मेलन की अनिवार्यता बन गए |


प्रदीप चौबे के साथ लेखक डॉ हरीशकुमार सिंह और अनिल कुरेल

कवि सम्मेलनों का वह स्वर्णिम दौर था जब शैल चतुर्वेदी , माणिक वर्मा , हुल्लड़ मुरादाबादी , सुरेन्द्र शर्मा , अशोक चक्रधर , ओमप्रकाश आदित्य, रमेश गुप्ता चातक और प्रदीप चौबे जैसे कवि अपनी हास्य व्यंग्य कविताओं से श्रोता दर्शकों में खूब पसंद किए जाते थे | प्रदीप जी की ‘रेल यात्रा’ खूब लोकप्रिय कविता रही है जिसे बच्चे याद करके सुनाया करते थे | प्रदीप जी जितने अच्छे कवि थे उतने ही ज़िंदादिल व्यक्तित्व के धनी थे | कवि सम्मेलनों में जाने पर , कवि सम्मेलन के पहले या बाद में जैसा भी समय हो अपने स्थानीय दोस्तों के यहाँ शायरी की महफिल जमा लेते थे क्योंकि वे एक उम्दा शायर भी थे | ऐसी ही एक महफिल उज्जैन के शायर रमेश सोज़ के यहाँ जमी थी जिसमे कवि मित्र अशोक भाटी सहित स्थानीय शायर सम्मिलित थे | वर्ष 1994 में गजल की वार्षिकी आरंभ-1 , और उसके बाद आरंभ-2 ,आरंभ-3 ,आरंभ-4 अंक उन्होने अपने सम्पादन में बहुत परिश्रम से निकाले जिसमें अंक 2 और अंक 4 गजल विश्वाङ्क थे जिसमें देश के साथ साथ विदेशी गजलकार भी थे जिसमें पाकिस्तान , कुवैत , न्यूयार्क , स्वीडन के गजलकार भी सम्मिलित किए गए थे | प्रदीप जी के दो गजल संग्रह ‘ बहुत प्यासा है पानी ‘ और ‘खुदा गायब है ‘ प्रकाशित हुए हैं | प्रदीप जी केवल सफल मंचीय कवि ही नहीं थे बल्कि हिन्दी साहित्य को भी उन्होने अपनी रचनाओं और कृतियों से सम्रद्ध किया |


कवि के रूप में वे देश के हर कोने में बुलाये गए और बैंकाक, हांगकांग ,सिंगापुर , दुबई ,बेल्जियम ,अमेरिका ,जर्मनी ,मस्कट ,कनाडा ,बहरीन सहित कई देशों की यात्राएं की | आपके हास्य व्यंग्य संग्रहों में ‘ बाप रे बाप’ , ‘चुटकुले उदास हैं ‘, ‘हल्के फुल्के’ सम्मिलित हैं | हास्य व्यंग्य में प्रदीप चौबे नए प्रयोग करते रहते थे तथा दो तीन पंक्तियों की कविताओं को पहले माइक्रो कवितायें और फिर ‘ आलपिन ‘ नाम से संग्रह प्रकाशित किया जो खूब चर्चा में रहा क्योंकि ये माइक्रो कवितायें , हैं छोटी पर व्यंग्य इतना सशक्त है कि चुभती आलपिन की तरह हैं | प्रदीप जी गद्यऔर पद्य दोनों में निष्णात थे और मंच के जादूगर कवि थे तथा आजकल उन्हें बहुधा शिखर कवि के रूप में अंत में कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया जाता था और श्रोता दर्शक उनका इंतेजार करते थे | इन दिनों वे स्त्री पुरुष के निजी सम्बन्धों पर अपना एक दार्शनिक गजल संग्रह पूरा कर चुके थे जो इंदौर के उनके एक मित्र प्रकाशित कर रहे थे|


अ. भा. टेपा सम्मेलन उज्जैन में प्रदीप चौबे

अंतर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस पर उज्जैन में पिछले 49 वर्षों से आयोजित होने वाले अखिल भारतीय टेपा सम्मेलन में प्रदीप जी खूब आए और वर्ष 2018 में आदरणीय डा शिव शर्मा जी को वादा करके गए थे कि वर्ष 2020 के पचासवें टेपा सम्मेलन में टेपा की स्वर्ण जयंती पर वे जरूर आएंगे | समय के साथ साथ प्रदीप जी को दोनों पैरों में कोई बीमारी हो गई थी और अब वे यात्राओं में सहायक को लेकर चलते थे | 48 वें टेपा में आए तो कवि दिनेश दिग्गज और मैं उन्हें व्हील चेयर के सहारे स्टेशन से लाये | मेरी आखरी मुलाकात प्रदीप जी से 6 सितम्बर 2018 को उज्जैन रेलवे स्टेशन पर हुई जब वे इंदौर से लौट रहे थे और किसी कार्य से उन्होंने मुझे बुलाया था | प्रदीप जी को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले जिनमें काका हाथरसी पुरस्कार , चकल्लस पुरस्कार और टेपा सम्मान प्रमुख थे | अपने आलपिन संग्रह में अपने पर व्यंग्य करते हुए प्रदीप जी ने संग्रह की अंतिम आलपिन लिखी और शीर्षक दिया – ‘दुनिया की सबसे छोटी कविता ‘ – “ क्यों बे , प्रदीप चौबे !” ऐसे ज़िंदादिल हंसमुख बेहतरीन कवि को नमन |

 

*डा हरीशकुमार सिंह
(लेखक वरिष्ठ व्यंग्यकार है)

यह भी पढ़े- प्रदीप चौबे की ये हास्य कविता पढ़कर रो पड़ेंगे आप



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